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शैशवावस्था अवस्था की अलग-अलग संवेदनाओं का उल्लेख कीजिए

शैशवावस्था की संवेदना ओं का उल्लेख कीजिए | vikasatmak siddhant ki shikshan upyogita bataiye

नमस्कार दोस्तो, जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि एक मनुष्य के जीवन को अलग-अलग अवस्थाओं के अंतर्गत बांटा गया है जिसके अंतर्गत मनुष्य के जीवन के अंतर्गत एक सबसे प्रमुख अवस्था होती है जिसे शैशवावस्था के नाम से जाना जाता है, जो कि किसी भी मनुष्य के जीवन में काफी महत्वपूर्ण अवस्था होती है, वह आज के इस आर्टिकल में हम आपको शैशवावस्था अवस्था के अलग-अलग संवेदनाओं के बारे में बताने वाले हैं। यदि आपको इस विषय के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको इसके बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

हम आपको इस पोस्ट के अंतर्गत हम शैशवावस्था अवस्था की अलग-अलग संवेदनाओं का उल्लेख करने वाले हैं, तथा इसके अलावा हम आपको इस विषय से जुड़ी हर एक जानकारी इस पोस्ट में देने वाले हैं।

शैशवावस्था अवस्था की अलग-अलग संवेदनाओं का उल्लेख कीजिए?

जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं, कि शैशवावस्था अवस्था किसी भी व्यक्ति के जीवन में काफी महत्वपूर्ण अवस्था होती है तो ऐसे में इसके अलग-अलग संवेदना निम्न प्रकार से होती है :-

  1. शैशवावस्था अवस्था के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति के जीवन में या फिर किसी भी बालक के जीवन में शारीरिक विकास काफी तीव्रता से देखने को मिलता है। इस अवस्था में बालक अपने जीवन के प्रति 3 वर्षों में अपनी शारीरिक विकास काफी धीमी गति से करने लगता है, प्रथम वर्ष के अंतर्गत बालक की लंबाई तथा उसके भार में तीव्र गति से बढ़ती होती है, इसके अलावा उसके अलग-अलग अंगों का भी विकास काफी तीव्रता से होता है।
  2. इस अवस्था के अंतर्गत किसी भी बालक की मानसिक क्रियाओं के अंतर्गत भी हमें वर्तिका की तीव्रता से देखने को मिलती है, अपने दिमाग के अंतर्गत अलग-अलग चीजों को सीखने लगता है, अपने दिमाग का विकास वह काफी तेजी से करने लगता है, एक बालक इस अवस्था के अंतर्गत यह समझने लगता है, कि क्या चीज होती है, यह दुनिया किस तरह से काम करती है, तथा अपने आसपास की चीजों को अपने मन के अंतर्गत सीखने लगता है, तथा फिर मैं उन्हें करने का प्रयास भी करता है।
  3. शैशवावस्था अवस्था के अंतर्गत किसी भी वादक के सीखने की तीव्रता भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है, वह अलग-अलग चीजों को अलग-अलग बातों को बहुत तेजी से सीखने लग जाता है। उदाहरण के लिए कोई भी बालक किस अवस्था के अंतर्गत सबसे पहले अपनी मां को पहचानना शुरू करता है, उसके बाद वह अपने आसपास के लोगों को पहचाना शुरू करता है, और फिर वह धीरे-धीरे सभी चीजों को पहचानने लग जाता है।

इसके अलावा भी इस अवस्था के अंतर्गत एक बालक अलग-अलग चीजों को सीखने लगता है, तथा उसके अंतर्गत अलग-अलग प्रकार की संवेदना आने लगती है। जैसे कि बालक दूसरों पर निर्भर कम होने लगता है, वह अलग-अलग चीजों को दोहराने लगता है, उसके अंतर्गत समय अंगो का प्रदर्शन करने की क्षमता आ जाती है, उस बालक के अंतर्गत अवस्था के दौरान प्रेम की भावना आ जाती है, वही दूसरों के बालकों के प्रति रुचि लेने लगता है, इसके अलावा वह अपने नैतिक भावना का अभाव करने लगता है, उसके अंतर्गत काम करने की प्रवृत्ति आ जाती है।

निष्कर्ष

तो इस पोस्ट के अंतर्गत हमने आपको बताया कि शैशवावस्था के दौरान कौन-कौन सी संवेदनाएं एक बालक के अंतर्गत आती है , इसके अलावा इस विषय से जुड़ी अन्य जानकारी अभी हमने आपके साथ शेयर की है। हमें उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई है, फिर तो आपको इस पोस्ट के माध्यम से कुछ नया जानने को मिला है।

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Aman

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