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Vinash kaale vipareet buddhi meaning in hindi

vinash kale viprit buddhi translated in hindi | vinaash kaale vipreet buddhi

दोस्तों, आज के समय बहुत से लोग  क्रोध में आकर  या आवेश में आकर गलत फैसले ले लेते हैं, और जब उन्हें समझ में आता है कि उनके हाथों कोई गलत काम हो चुका है तब उन्हें एक वाक्य याद आता है कि “विनाश काले विपरीत बुद्धि”।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि “Vinash kaale vipareet buddhi meaning in hindi ” क्या है?  अगर नही तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं, क्योंकि आज के लेख में हम आपको बताएंगे Vinash kaale vipareet buddhi meaning in hindi और इस वाक्य का इस्तेमाल कहां किया जाता है इसके ऊपर भी बात करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं-

Vinash kaale vipareet buddhi meaning in hindi (विनाश काले विपरीत बुद्धि का हिंदी मतलब)

दोस्तों विनाश काले विपरीत बुद्धि एक “संस्कृत भाषा” का श्लोक है, और किसे सबसे पहले चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र के 16 अध्याय में इस्तेमाल किया था। इसके रचयिता भी चाणक्य ही है, लेकिन इससे संबंधित हमारे वेदों में अर्थशास्त्र में तथा महाभारत के भगवत गीता से भी प्राप्त होते हैं।

विनाश काले विपरीत बुद्धि श्लोक का अर्थ है कि, “जब मनुष्य पर नाश छाता है या जब मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है तथा वह सही निर्णय की जगह गलत निर्णय लेने लगता है, जिसके कारण उसका नाश सुनिश्चित होता है।”

यहां पर “नाश” केवल मृत्यु से ही नहीं, बल्कि “हानि” से भी संदर्भित है। यानी कि, यदि किसी व्यक्ति का कोई नुकसान होना हो, और यदि किसी व्यक्ति का भयंकर नुकसान निकट हो, तो वह व्यक्ति हमेशा गलत फैसले लेता है, जिसके कारण उसका वह नुकसान सुनिश्चित हो जाता है।”

इसका एक मतलब ऐसे भी निकाला जा सकता है, जो की सबसे ज्यादा प्रचालिटी भी है कि –

“जब मनुष्य का नाश निकट आता है तो उसकी बुद्धि हो जाती है। ”

“विनाश काले विपरीत बुद्धि श्लोक” कहां से लिया गया है?

विनाश काले विपरीत बुद्धि श्लोक चाणक्य की नीति शास्त्र से लिया गया है। चाणक्य नीति शास्त्र के 16वें अध्याय में इसका वर्णन किया है। यह श्लोक कुछ इस प्रकार है-

न निर्मिता केन न दृष्टपूर्वा न श्रूयते हेममयी कुरङ्गी।

तथाऽपि तृष्णा रघुनन्दनस्य विनाशकाले विपरीतबुद्धिः।

इस श्लोक में चाणक्य यह कहना चाहते हैं कि, जब रघुनंदन यानी कि भगवान श्रीराम को रावण के मामा मारीच ने,  रावण के कार्य से ध्यान हटाने के लिए और उन्हें बेवकूफ बनाने के लिए सोने की हिरनी का रूप बनाया था, तब भगवान श्रीराम भी उसे सोने की हिरनी का शिकार करने के लिए और उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे पीछे दौड़ गए थे। जबकि भगवान श्रीराम को भी है पता था कि सोने की हिरनी जैसा कुछ भी नहीं होता है। इसीलिए यह कहा गया है कि विनाश काल में बुद्धि सही से काम नहीं करती या विपरीत हो जाती है।

विनाश काले विपरीत बुद्धि का उदाहरण दीजिए:-

“विनाश काले विपरीत बुद्धि” का एक सर्वथा उचित उदाहरण में भगवत गीता और महाभारत में देखने को मिलता है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण पांडवों का शांति समझौता लेकर और शांति संदेश लेकर कौरवों के पास गए थे, और वहां पर दुर्योधन ने शांति संदेश को ठुकरा दिया था, और भगवान श्री कृष्ण को बंदी बनाने के लिए आदेश दे दिए थे।

भगवान श्री कृष्ण को, जो कि स्वयं परमपिता परमेश्वर हैं, बंदी बनाने का प्रयास किया गया, जिसके पश्चात भगवान श्री कृष्ण ने अपना विकराल रूप दिखाते हुए यह कहा था कि अब यद्ध होगा जिसमे कौरवों का विनाश निश्चित होगा।

इस प्रकार दुर्योधन ने अपनी भ्रष्ट बुद्धि से अपना नाश सुनिश्चित कर लिया।

इसी के संबंध में रामधारी सिंह दिनकर ने रश्मिरथी में भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कहे गए शब्दों को अपने शब्दों में लिखा है, और एक कविता के रूप में इसका संकलन किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि भगवान श्री कृष्ण  पांडवों के शांति समझौते को सुनाते हुए कहते हैं कि:-

“ दो न्याय अगर तो आधा दो,

पर इसमें भी यदि बाधा हो,

तो दे दो केवल पाँच ग्राम,

रखो अपनी धरती तमाम।

हम वहीं खुशी से खाएंगे,

परिजन पर असि न उठायेंगे।

 

दुर्योधन वह भी दे न सका,

आशीष समाज काले ना सका,

उलटे हरि को बांधने चला,

जो था असाध्य साधने चला।

 

जब नाश मनुज पर छाता है,

पहले विवेक मर जाता है।

हरि ने भीषण हुंकार किया,

अपना स्वरूप विस्तार किया,

डगमग डगमग दिग्गज डोले,

भगवान् कुपित होकर बोले-

जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,

हां, हां दुर्योधन बांध मुझे।

निष्कर्ष

आज के लिए हमने यह जाना कि Vinash kaale vipareet buddhi meaning in hindi क्या है, और इसका संबंधित पूरा श्लोक कौन सा है। आज के लेख में हमने विनाश काले विपरीत बुद्धि का उदाहरण भी सही से पढ़ा है। हम आशा करते हैं कि आप पहले काफी काफी ज्ञानवर्धक रहा होगा। यदि आपको सवाल पूछना चाहते तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

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