Education

रामचरितमानस के रचयिता कौन है? | Ramcharitmanas ke rachnakar

रामचरितमानस के रचयिता कौन थे? | ramcharitmanas ke rachnakar kaun hai

दोस्तों, रामचरितमानस अपने आप में एक ऐसी रचना है जो कि अद्वितीय है। ऐसी रचनाएं शायद ही भविष्य में कभी दुबारा की जा सकेगी। महाभारत में भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं दिखाते हुए नजर आते हैं, जबकि रामचरितमानस में भगवान श्री राम के चरित्र के बारे में जानकारी दी जाती है। भगवान श्री राम के जन्म से लेकर उनके कार्य उनकी उपलब्धियां और उनके जीवन के बारे में सारी बातें रामचरितमानस में विस्तार से बताई जाती है।

रामचरितमानस अपने आप में एक बहुत बड़ा ग्रंथ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महा ग्रंथ रामचरितमानस के रचयिता कौन हैं? यदि आप नहीं जानते और जानना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं क्योंकि आज हम आपको बताएंगे कि रामचरितमानस की रचना कब हुई (ramcharitmanas ke rachaita kaun hai), रामचरितमानस से हमें क्या सीखने को मिलता है, इन सब के बारे में आज हम आपको सारी जानकारी देने वाले हैं। तो चलिए शुरू करते हैं:-

रामचरितमानस के रचयिता कौन है? | ramcharitmanas ke lekhak kaun hai

दोस्तों, रामचरितमानस अपने आप में एक महाकाव्य है और सोलवीं सदी में लिखा गया “गोस्वामी तुलसीदास जी” के द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ भी है। रामचरितमानस की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी भाषा में की थी। इस ग्रंथ को अवधी भाषा में लिखा गया एक महान साहित्य माना जाता है,

जो रामायण तुलसीदास ने लिखी थी उसे तुलसीकृत रामायण या तुलसी रामायण के नाम से भी जाना जाता है। यह भारतीय संस्कृति का एक बहुत बड़ा और अद्वितीय लेख है, जिसकी लोकप्रियता अद्वितीय है।

उत्तर भारत में रामायण को सर्वाधिक और प्रतिदिन पढ़ा जाता है। रामचरितमानस के अंतर्गत सुंदरकांड का पाठ शरद नवरात्रि में 9 दिन लगातार किया जाता है, और रामायण मंडलों के द्वारा कई बार मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ किया जाता है।

तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के अंतर्गत भगवान श्रीराम को एक नायक के रूप में प्रदर्शित किया है जो कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम है। भगवान श्रीराम अखिल ब्रह्मांड के स्वामी और श्री हरि विष्णु नारायण के अवतार हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दूसरी और महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण में राम जी को एक आदर्श चरित्र मानव के रूप में दिखाया है, जिसे मानव समाज शिक्षा प्राप्त कर सकता है।

बाल्मीकि जी है दिखाते हैं कि जिस प्रकार रामजी अनेकों विघ्नों और बाधाओं को पार करके अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए सर्वशक्तिमान होते हुए भी मर्यादा में रहते हैं, उसी प्रकार समाज में भी वही मर्यादा और शक्ति पर नियंत्रण होना आवश्यक है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में अनुपम शैली में श्लोकों का निर्माण किया है, और इसे चौपाइयों, सोरठा, और छंद का आश्रय लेकर वर्णन किया है।

रामचरितमानस से हमें क्या सीखने को मिलता है?

ramcharitmanas ke rachayita kaun hai
रामचरितमानस की रचना किसने की थी? | ramcharitmanas ke rachayita kaun hai

दोस्तों, रामचरितमानस में हमें कई प्रकार की शिक्षा मिलती है जैसे कि:-

  • भगवान श्री राम के जीवन चरित्र को अपने जीवन में धारण करके हम एक आदर्श व्यक्ति बन सकते हैं।
  • घोर कलयुग में भगवान श्री राम का नाम सभी दुखों से मुक्ति देने वाला होता है।
  • यदि हमें सफलता प्राप्त करनी है तो हमारे ह्रदय में त्याग की भावना भी होनी चाहिए।
  • इसके अलावा हमें जितना हो सके बुराई से दूर रहना चाहिए। क्योंकि बुराई आमतौर पर सबसे श्रेष्ठ उपाय नजर आता है लेकिन एक बार बुराई का चुनाव करने पर बुराई हमें अपने दलदल में फंस आती रहती है जो अंत में हमारे नाश का कारण बनती है।
  • भगवान श्रीराम की तरह हमें बुरे से बचना चाहिए।
  • श्री रामचरितमानस से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें कुसंगति से बचना चाहिए।
  • हमें शिक्षा को धारण करना चाहिए। कुसंगति के कारण रावण जैसे महापंडित भी राक्षस बन जाते हैं। कुसंगति के कारण एक व्यक्ति हजारों बार धर्म करके भी अधर्मी बन जाता है।
  • कुसंगति के कारण व्यक्ति के चरित्र पर नकारात्मकता हावी हो जाती है।
  • यदि हमें सफलता प्राप्त करनी है तो निस्वार्थ कार्य करना हमें उसी प्रकार सफलता प्रदान करता है जिस प्रकार समुद्र पर बनाया गया रामसेतु भगवान श्रीराम को उनके लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करता है।
  • अपने ह्रदय में बदले की भावना रखना कई बार हमारे लिए स्वयं के लिए हानिकारक हो जाता है। क्योंकि जब हम किसी भी व्यक्ति के लिए बदले की भावना रखते हैं।

तब हम स्वयं पर ध्यान देने के बजाय दूसरे पर अधिक ध्यान देते हैं, जिसके कारण हमारे दिल में बदले की भावना, क्रोध, विश्वासघात प्रतिशोध, इन सभी को जन्म देती है, जो अंत में हमारा ही विनाश कर देती है।

  • धैर्य और शांति के कारण हमारे आधे से ज्यादा काम बन जाते हैं।
  • मानव के पास वचन ही शक्ति होती है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि जो वचन हम एक बार दे उसका पालन भी करें। लेकिन हमें यह भी कोशिश करनी चाहिए कि भीष्म प्रतिज्ञा की तरह हमें अपने वचन के कारण अधर्म का पालन नहीं करना चाहिए। यह सभी शिक्षाएं हमें रामचरितमानस से मिलती है।

रामचरितमानस क्यों महत्वपूर्ण है?

भगवान श्री राम के आदर्श रूप में जीवन को मानव समाज में दिखाने के लिए और किस प्रकार एक आदर्श पुरुष सभी विघ्नों को पार करते हुए अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करता है, और मानव समाज किस प्रकार उन्नति को प्राप्त कर सकता है यह बताने के लिए रामचरितमानस अत्यंत महत्वपूर्ण है। रामचरितमानस एक ऐसे अवतार की कहानी है जिससे आज के समय हर व्यक्ति अपने आप को मिला सकता है यानी कि रिलेट कर सकता है।

हमारे जीवन में भी हजारों प्रकार की समस्याएं होती है, अनेकों प्रकार की मुश्किलें हमें हमारा लक्ष्य प्राप्त करने से रोकती है, और कई बार तो हमारे साथ कुछ ऐसी अप्रिय घटनाएं घट जाती है जो हमें अंदर तक झकझोर कर रख देती है।

लेकिन उन सभी परिस्थितियों से किस प्रकार निपटा जा सकता है और किस प्रकार सभी दुखों को चलते हुए और दुखों से तार होते हुए हम हमारे लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, यह जानकारी यह लक्ष्य और यह शिक्षा एक महत्वपूर्ण ज्ञान के रूप में हमें रामचरितमानस सीखने को मिलता है। यह शिक्षा समाज में देने के लिए रामचरितमानस अत्यंत ही महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

दोस्तों, आज के इस लेख में हमने आपको यह बताया है कि रामचरितमानस के रचयिता कौन है? (shri ramcharitmanas ki rachna kisne ki thi) इसके अलावा हमने आपको यह भी बताया है कि रामचरितमानस का महत्व क्या है, और रामचरितमानस से हमें क्या सीख मिलती है।

हम आशा करते हैं कि रामचरितमानस के बारे में हम आपको कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने में समर्थ हो पाए होंगे, और आप यह जान गए होंगे कि रामचरितमानस के रचयिता कौन है? (ramcharitmanas ki rachna kisne ki hai) जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

FAQ

रामचरितमानस किसने और कब लिखा था?

कवि तुलसीदास द्वारा 16वीं शताब्दी में लिखी गई यह कविता एक व्यक्तिगत ईश्वर के प्रति प्रेम की अपनी महान अभिव्यक्ति और एक पति और शासक (राम), पत्नी (सीता) के आदर्श आचरण के अपने पात्रों के माध्यम से इसके उदाहरण से प्रतिष्ठित है।

रामचरित मानस में कुल कितने दोहे हैं?

14- श्री रामचरित मानस में कुल “दोहा संख्या” – 1074 है।

रामायण में कौन सा अक्षर नहीं है?

रामचरित मानस में हिंदी वर्णमाला का ‘स’ अक्षर नहीं आया है। संस्कृत के श्लोकों में ही इसका प्रयोग होता है। इस अक्षर का प्रयोग न करने का कारण यह है कि रामचरित मानस अवधी भाषा में है और अवधी भाषा में श का प्रयोग नहीं है, अवधी भाषा में स और श का ही प्रयोग होता है।

Related Articles

Back to top button