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ekadashi kab hai : today mokshada ekadashi kab ki hai and geeta jayanti pooja vidhi mantra vishnu – Astrology in Hindi

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मोक्षदा एकादशी दिसंबर 2022: आज मोक्षदा एकादशी है। मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष एकादशी को मोक्षदा एकादशी व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितरों को भी मोक्ष मिलता है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इसी दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म से विमुख अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसी दिन गीता जयंती मनाई जाती है। एकादशी तिथि की शुरुआत तीन दिसंबर के दिन शनिवार सुबह 5:39 बजे होगी और समापन चार दिसंबर को सुबह 5:34 बजे होगी। इस साल 5159वीं जंयती मनाई जाएगी। इस दिन गीता पढ़ी और प्राप्त अत्यंत ही शुभ मानी जाती है।

कब रखा जाएगा एकादशी का व्रत
मोक्षदा एकादशी का व्रत 3 दिसंबर को रखा जाएगा। इस दिन सूर्योदय 06.58 बजे होगा। उदयतिथि के अनुसार मोक्षदा एकादशी 03 दिसंबर को मनाई जा रही है।

आज एकादशी के दिन सुबह 07 बजकर 4 मिनट से सूर्ययोग शुरू हो रहा है, जो अगले दिन सुबह 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए रवि योग शुभ है। ऐसे में आज सुबह 09 बजकर 28 मिनट से 01 बजकर 27 मिनट तक विष्णु जी की पूजा कर सकते हैं।

मुहूर्त-
एकादशी घोषणा – संलग्नक 03, 2022 को 05:39 पूर्वाह्न बजे
एकादशी तिथि – क्लोज 04, 2022 को 05:34 पूर्वाह्न बजे
एकादशी व्रत पूर्ण करने का समय- 4 दिसंबर 01:04 अपराह्न बजे से 03:09 अपराह्न बजे

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एकादशी पूजा-विधि-
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
भगवान विष्णु को पुष्पांजलि और तुलसी दल अर्पित करें।
यदि संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
भगवान की आरती करें।
भगवान को भोग। इस बात का खास ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को अवश्य शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।
इस पावन दिवस भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें।
इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।

मोक्षदा एकादशी के दिन फूल और तुलसी के पत्ते को नहीं तोड़ना चाहिए। मोक्षदा एकादशी के पहले दिन ही तुलसी के पत्तों को तोड़कर रखना चाहिए।

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