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Vat Savitri Vrat – आदर्श नारीत्व का प्रतीक है यह पावन व्रत

ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा है। इस व्रत में ‘वट’ और ‘सावित्री’ का विशेष महत्व है। इस व्रत में सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रावण है। पवन सत्यवान के प्राण यमराज से चलने वाले व्यक्ति के लिए यह पवन सत्याधारी की आयु के लिए होता है।.. . . . . . . . . . . . . . . . . तो . . . . . . . तो . . . . . . . . . तभी . . . . . . . . वैसे तो . . . . . . . . . . . . . . . . जाओ . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . ) . . . . . . . . . . . . . तो हो . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . ? . . . . . . . . . . . यह आदर्श नारीत्व का प्रतीक है। पुराणों में कहा गया है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, गोकू विष्णु व गोमय कावास का वास है। इसके वट वृक्ष और अमरत्व-बोध के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाता है।

️स्त्र️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ सौभाग्यवती स्त्रियां, पति की आयु और सुख-समृद्धि की संतानों। वट वृक्ष की धूप नवेद्य से संबंधित है। रोली, कलात को वाट्सएप पर लपेटा जाता है। घटना के बाद होने वाले नुकसानों में। इस व्रत के मूल में जल से सींचती हैं। वट वृक्ष की तारीखें। इस दिन स्नान करने के लिए नए वस्त्र तैयार किए गए हैं। वट वृक्ष के मौसम के अनुसार ही पत्रिका का अध्ययन किया जाता है। ️️️️️️️️️️ धान की फसलें। फल, फूल, मौली, चने की डंडल, अक्षत, धूप-दीप, रोली आदि से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ है फूल हैं, मौली, चने की दाल, अक्षत, धूप, रोली आदि। वट वृक्ष ज्ञान का भी चिन्ह है। ज्ञान प्राप्त हुआ था। मान्यता है कि जो महिलाएं इस व्रत को निष्ठा से रखती हैं, उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है। रोग दूर हो गया है। परिवार में सुख-शांति। वट वृक्ष पूजा से घर में धनलक्ष्मी का स्थान है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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