Panchaang Puraan

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ऋक्सिंताशास्त्र के अनुसार ऋक्सिकता की वजह से किसी व्यक्ति के जीवन में कई तरह की स्थिति का सामना करना पड़ता है। सर्वोच्चता से मुक्ति के लिए किसी व्यक्ति को हनुमान जी की पूजा- अर्चन करनी चाहिए। हनुमान जी की पूजा- अर्चना करने से सभी तरह के दोष दूर हो जाते हैं और जीवन सुखमय हो जाता है। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए श्री राम और माता सीता के नाम कामिरन होना चाहिए और हनुमान जी को हनुमान जी का सातवां पाठ देना चाहिए। आगे पढ़ें श्री हनुमान चालीसा-

  • श्री हनुमान चालीसा- (श्री हनुमान चालीसा)

श्रीगुरु चरण सरोज रज
निजमनु मुरूर सुधारि
बरनौँ रघुबर बिमल जासु
जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुण्डल कुच्छित केसा।।

हाथ बजर और ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेउ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन
प्रताप तेज महा जग वंदन।।

बिद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया।।

गुरु होने जा रहे हैं मार्गी, इन राशियों का होगा महालाभ

सूक्ष्म रूप धरि सियहिंव प्रकट
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे
रामचन्द्र के काज संवरे।।

लाय सजीवन लखन जियाये
श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ी
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कंठवैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनिसा
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जाते
कबि कोबिद कहि जा ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिला राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना जाता है
लंकेश्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानु
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रा मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघी गया अचरज नहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
विशेष अनुग्रह तुमहरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे
होत निबिंनु पैसारे
सब सुख लहैं तुम सरना
तुम रच्छक कहू को डर ना।।

आप तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तें काँपी
भूत पिसाच निकट नहीं है
महाबीर जब नाम सुनाए।।

नासै हरे सब पीरा
जपत निरन्तर हनुमत बीरा
संकट तें मानवता साकार
मन क्रम बचत ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों तरफ जुग परताप
परसिद्ध जगत उजियारा है
साधु सन्त के तुम रखवारे
असुर निकन्दन राम दुलारे।।

अष्टसिद्धि नौ निधि के द्रष्टा
अस बर दीन जानकी माता
राम तुम्हरे पासा
सदा पहले रघुपति के दास।।

तुह्मरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अंत काल रघुबर पुर जय
जहां हर जन्म भक्त ने कहा।।

और देवता चित्त न धुरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
संकट कटै मिता सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा

तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

पवनतन्य संकट हरन, मंगल मूरति रूप
राम लखन सीता सहित, हृदय बसु सुर भूप।।

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