Panchaang Puraan

This special yoga is being made for the liberation of ancestors – Astrology in Hindi

वैज्ञानिक विज्ञान और ज्योतिषाचार्य महर्षि बोधायन का श्लोक गच्छा योग योग की स्थायी है। यह श्लोक है ‘यदु: पितृदैयैवत्ये, सूर्यश्चिवैवत्य:। त्रयोदशी तिथौ स्यातां गच्छायेति कीर्तिता।। हंससेकरास्थिते या तू अमावस्या करन्विता। सा ज्ञेय कुँजरच्छाया इति बौधायनोऽब्रह्मित।।’ दूषण भाद्र पोस्‍ट में गोस्‍ट नक्षत्र हो, सूर्य नक्षत्र में हो और अमावस्या में यह स्थिति अमावस्या को अमावस्या को अमावस्या को नक्षत्र में मिला। इस संबंध में पितरों के निमित्त तर्पण से पुत्रों को मुक्ति मिलती है।
. धन्य-धन्य की कोई कमी नहीं है। … इस सूर्य अस्तु कृष्ण त्रयोदशी वायुमंडलीय 10:39 से प्रभात 3:10 बजे तक सुबह 4:30 बजे इस मौसम में मौसम मंगल नक्षत्र होगा और सूर्य अस्त नक्षत्र में होगा। होगा।

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मध्य रात्रि 1:10 बजे से 16:34 बजे बजे तक अमावस्या के दिन कनेक्ट। 15 मिनट 20 तक का औसत उत्तम कहा गया है। इस सूर्य सूर्य और सर्वशक्तिमान अमावस्या का पर्व पर्व। मूवी ऑल पित्रोण के निमित्त-विधान से श्राद्ध से सक्रिय होने के लिए सक्रिय होने वाले मस्तिष्क को सक्रिय करने के लिए प्रेरित किया जाता है। जैसे स्कंद पुराण, शास्त्र पुराण, वरहु पुराण और महाभारत में भी गच्छा योग का वर्णन है। कहा तो यह जाता है कि इस दिन किसी तीर्थ क्षेत्र में स्नान करने से एवं अपने पितरों के निमित्त जलांजलि देने से पितरों की तृप्ति होती है। गच्छडाया का अर्थ भी यह है कि एक दूसरे को जोड़ने के लिए चकिच में स्विच करते हैं। हमारे पेटर संतुष्ट हैं।
(ये सही ढंग से काम कर रहे हैं और जनता के लिए ऐसी स्थिति में हैं।)

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