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supreme court chief justice 22 in 24 years question amid election commission discussion – India Hindi News

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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है और उनके 6 साल का कार्यकाल पूरा न करने पर भी चिंता जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा था कि फाइनल 2004 के बाद से अब तक कोई भी मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यकाल क्यों पूरा नहीं कर सका। कोर्ट ने कहा था कि 26 साल में देश ने 15 मुख्य चुनाव आयुक्त देखे हैं। हालांकि एक तथ्य यह भी है कि खुद सुप्रीम कोर्ट में ही 24 साल में 22 मुख्य न्यायाधीश हुए हैं। वहीं इससे पहले के 48 साल में 28 चीफ जस्टिस रहे थे। जनवरी 1998 में जस्टिस सत्य पुंशी को मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति मिली थी और वह 9 महीने ही पद पर रहे।

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उनके बाद 1998 में ही अक्टूबर में जस्टिस ए.एस. आनंद को आदेश मिल गया था। आनंद का कार्यकाल करीब तीन साल तक रहा और 2001 तक मुख्य न्यायाधीश रहे। हालांकि उनके बाद जस्टिस एस. पी भरूचा चीफ जस्टिस बने, जो 6 महीने ही पद पर रह सके। उन्हें नवंबर 2001 में जिम्मेदारी मिली थी और मई 2002 में वे आरोपित हो गए थे। उनके बाद जस्टिस बी.एन कृपाल को चीफ जस्टिस के तौर पर जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन वह भी 7 महीने ही पद पर रहे। उनका 18 दिसंबर, 2002 को मोहभंग हो गया था। यही नहीं बाद में उनके प्रमुख न्याय बने गबयक का कार्यकाल तो 1 महीने का ही रहा। वह नवंबर 2002 में मुख्य न्यायाधीश बने और दिसंबर में निर्वस्त्र हो गए।

75 साल में 50 चीफ जस्टिस, औसतन डेढ़ साल का कार्यकाल

आजादी के बाद से अब तक सुप्रीम कोर्ट में कुल 50 चीफ जस्टिस हुए हैं। इस तरह देखें तो 75 साल की यात्रा में सुप्रीम कोर्ट के एक मुख्य न्यायाधीश का औसत कार्यकाल अधिकतम लदान वर्ष ही रहा। यही नहीं 2017 से 2022 तक ही बीते 5 साल में सुप्रीम कोर्ट ने 6 मुख्य न्यायाधीश देखे हैं और अब 7वें दीप चंद्रचूड़ अभी पद पर हैं। सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति करने वाले 4 सीनियर जजों के कॉलेजियम ने 1998 से अब तक 111 जजों की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की है।

एससी के कॉलेजियम सिस्टम पर भी क्यों बढ़ रहे हैं सवाल

अधीनस्थ है कि इससे पहले एक बार न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सरकार ने राष्ट्रीय प्राधिकरण निर्धारण प्राधिकरण का प्रस्ताव रखा था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था। बता दें कि जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम सिस्टम की भी आलोचना हो रही है। सुप्रीम कोर्ट की महिला जज जस्टिस रोमा पाल ने भी इस व्यवस्था पर सवाल करते हुए कहा कि यह ऐसा है कि तुम मेरी पीठ खोलो और मैं तुम्हारे।

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