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मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है?

mastishk ka adhyayan kya kehlata hai

मित्रों, मस्तिष्क हमारे शरीर का वह भाग होता है जो हमारे पूरे शरीर को नियंत्रित करता है। न केवल हमारे शरीर को नियंत्रित करता है बल्कि हमारे शरीर को चलाएं मान रखने के लिए मस्तिष्क का स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक होता है।

इसके लिए कई प्रकार के ऐसे डॉक्टर होते हैं जो मस्तिष्क का अध्ययन करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मस्तिष्क के अध्ययन को क्या कहते हैं? या मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है?

यदि आप नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं क्योंकि आज के लेख में हम आपको यह बताने वाले हैं कि मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है, मस्तिष्क का ज्ञान कैसे किया जाता है, मस्तिष्क का अध्ययन करने के लिए कौन सी शिक्षा दी जाती है।

इन सब के बारे में आज हम आपको विस्तार से जानकारी देंगे। तो चलिए शुरू करते हैं-

मस्तिष्क का अध्ययन क्या होता है?

किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क और उसके व्यवहार का अध्ययन करना उस व्यक्ति को नया जीवन देने जैसा होता है। क्योंकि कई बार लोगों को मस्तिष्क संबंधी बीमारी होती है जिसका इलाज करना जरूरी हो जाता है। यह कार्य एक संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक करता है। संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिकों कभी-कभी मस्तिष्क का वैज्ञानिक भी कहा जाता है। क्योंकि वह मस्तिष्क का अध्ययन करता है।

इसके अंतर्गत है यह पता लगाता है कि मानव मस्तिष्क किस प्रकार काम करता है, किस प्रकार सोचता है, किस प्रकार याद करता है, किस प्रकार समझने का प्रयास करता है, किस प्रकार घटनाओं को देखता है, समझता है, निर्णय लेने का काम करता है, उसके तंत्रिका तंत्र से लेकर उसके द्वारा किए गए कार्यों के निर्णय के बारे में एक संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक पड़ताल करता है।

संज्ञानात्मक मनोविज्ञान के अंतर्गत हमारी मानसिक प्रक्रिया का पता लगाया जाता है और उसके बारे में जानकारी जुटाई जाती है।

मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है?

mastishk ka adhyayan kya hota hai? | मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है

अब हम जानते है कि मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है। मस्तिष्क के अध्ययन को मस्तिष्क विज्ञान या संज्ञानात्मक मनोविज्ञान कहा जाता है। इंग्लिश में मस्तिष्क विज्ञान के अध्ययन को कॉग्निटिव साइकोलॉजी (Cognitive Psychology) कहा जाता है।

कॉग्निटिव साइकोलॉजी के अंतर्गत हम हमारे दिमाग, जो कि मानव मस्तिष्क के रूप में हमें एक शक्तिशाली उपकरण मिला है, इसके बारे में इसकी सीखने की प्रक्रिया, याद करने की प्रक्रिया, देखने की, सुनने की, समझने की, बात करने की। बात बताने की, यह सभी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

क्योंकि कई बार इंसानी दिमाग किसी भी इंसान को फेल करने में समर्थ होता है। संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक यह अध्ययन करते हैं कि लोग कैसे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। या जानकारी को समझते हैं, प्रक्रिया करते हैं, प्रतिक्रिया करते हैं, जानकारी को संग्रहित करते हैं, उसका इस्तेमाल करते हैं, भाषा सीखते हैं, भाषा सीखने के तरीके को खोजते हैं, अनुभूति और भावना के बीच में परस्पर की क्रिया को समझने का प्रयास करते हैं।

इन सब के बारे में एक संज्ञानात्मक वैज्ञानिक पूर्ण रूप से अध्ययन करता है। MRI अर्थात मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग जिसे हिंदी में चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग कहा जाता है।

इसके अंतर्गत एक डॉक्टर किसी भी मरीज के मस्तिष्क की तस्वीर को देख सकता है, और यह समझने का प्रयास कर सकता है कि उसके शरीर के इस महत्वपूर्ण हिस्से में किस प्रकार की बीमारियां कमी नजर आती है।

लेकिन उस मस्तिष्क के अंतर क्या चल रहा है मष्तिष्क अन्दर से किस प्रकार काम कर रहा है, यह कार्य संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक करता है।

मस्तिष्क का अध्ययन कैसे किया जाता है? – मस्तिष्क अध्ययन करने के लिए कौन सी शिक्षा प्राप्त की जाती है?

  • आप मस्तिष्क का अध्ययन करना चाहते हैं अर्थात मस्तिष्क वैज्ञानिक बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले मनोविज्ञान के अंतर्गत एक बैचलर डिग्री प्राप्त करनी होगी
  • इसके पश्चात आपको मनोविज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त करनी होगी और मास्टर डिग्री करते समय आपको ऑप्शनल डॉक्टरेट कोर्स भी करना होगा जो एक सुपरवाइजर एक्सपीरियंस ने डॉक्टर के अंतर्गत किया जाएगा।
  • इसके पश्चात आपको Examination for Professional Practice in Psychology की परीक्षा को पास करना होगा और मस्तिष्क का अध्ययन करने के लिए शिक्षा प्रदान की जाएगी।
  • आपको साइकोलॉजि के अंतर्गत भी कॉग्निटिव साइकोलॉजी पढ़ाई जाएगी।
  • साइकोलॉजि का कोर्स करने से लेकर कॉग्निटिव साइकोलॉजी का कोर्स करने तक आपको 10 वर्षों का समय आराम से लग जाएगा।
  • इसके पश्चात आपको कॉग्निटिव साइकोलॉजिस्ट का लाइसेंस मिल जाएगा।
  • अब आप एक मस्तिष्क वैज्ञानिक के तौर पर मस्तिष्क का अध्ययन कर सकते हैं।

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अंतिम विचार

आज के लेख में हमने आपको यह बताया है कि मस्तिष्क का अध्ययन क्या होता है, मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है, तथा मस्तिष्क का अध्ययन कैसे किया जाता है।

हम आशा करते हैं कि आज का हमारा यह लेख पढ़ने के पश्चात आप यह अच्छे से जान गए होंगे कि मस्तिष्क का अध्ययन क्या कहलाता है। जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। यदि आपके मन में इस लेख से संबंधित कोई सवाल है जो आप हमसे पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

मस्तिष्क का सोचने वाला भाग कौन सा होता है?

सेरेब्रम मानव मस्तिष्क का मुख्य सोच वाला हिस्सा है। प्रमस्तिष्क मस्तिष्क का बड़ा और बाहरी भाग होता है। यह पढ़ने, सोचने, सीखने, बोलने, भावनाओं और चलने जैसी नियोजित मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। प्रमस्तिष्क (अग्रमस्तिष्क का एक प्रमुख भाग) मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है।

मस्तिष्क का सबसे छोटा भाग कौन सा है?

अनुमस्तिष्क पश्चमस्तिष्क का एक भाग है। इसे छोटा मस्तिष्क भी कहा जाता है जो मस्तिष्क के पीछे स्थित होता है।

मस्तिष्क की खोज कब हुई थी?

मस्तिष्क का सबसे पहला संदर्भ 17वीं शताब्दी ईसा पूर्व में लिखे गए एडविन स्मिथ सर्जिकल पेपिरस में मिलता है। मस्तिष्क के लिए हाइरोग्लिफ, इस पपाइरस में आठ बार होता है, दो सिर में घायल रोगियों के लक्षण, निदान और रोग का वर्णन करता है, जिनकी खोपड़ी के मिश्रित फ्रैक्चर थे।

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