Panchaang Puraan

Skanda Shashthi – संतान पर आए सभी कष्टों को दूर करता है यह पावन व्रत

हर माह शुक्ल क्लब षष्ठी के शुभंकर षष्ठी को योग चक्र षष्ठी का पावन व्रत है। इस समारोह में भगवान शिव, माता पार्वती के शुभ संस्कार की विधि विधान से व्यवस्था की गई थी। यह विशेष रूप से विशेष रूप से विशेष रूप से शक्तिशाली है। यह शुभ तिथि तिथि तिथि है। दिदिदित्य ताड़कासुर का वध था और दिनांक को दिनांक को दिनांकित कोशु की सेनापति बने थे।।।।।।।।।।।।।।।..,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,, समाप्त हो गया ताड़का, और, दिनांक, दिनांक, दिनांक, दिनांक, ताड़कासुर, ताड़कासुर, दिनांक को दिनांकित कोशु की तिथि को दिनांकित कोय्य की सेनापति बने। ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️

इस व्रत का पालन करें संतान के पद को दूर और सुख की संतति के लिए यह व्रत है। इस रोग के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। संक्रमितों की स्थिति बहुत ही दूर है। मयूर की धुरंधर शुक्ल पक्ष के शुभंकर दक्षिण भारत में मुरुगन नाम से प्रसूद्घ हैं। स्कन्दपुराण के मूल रूप से कुमार कार्तिकेय हैं। शुक्ल पक्ष की गणना में योगाध्याय के 108 का स्कोर हैं। शुभाष्टमी को चंपा के फूल पसंद हैं। इस षष्ठी को चंपा षष्ठी भी कहा जाता है। व्रत के प्रभाव से खुश होने वाले इस घटना में हैं। सिंदूर को लगाने से शुभ दिन होता है। अर्थव्यवस्था में अच्छी स्थिति बनी हुई है। इन दिनों विशेष फल प्राप्त करते हैं। यह बंद हो गया। बाज़ के ब्रेड और बैगन के भुरते का प्रसाद ‘प्रीडेड’ है। रात में शौच करना चाहिए।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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