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Shri Ganesh 15 September 2021 Know Ganesh Puja 108 Names Of Ganesh And Ganesh Ji Ki Aarti

बुधवार गणेश पूजा: 15 फरवरी 2021 को बृहस्पतिवार का दिन। . पंचांग के दिन भाद्रपद मास की शुक्ल की नवमी तारीख है। इसके सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है और बुध ग्रह कन्या राशि में विराजमान है। ज्योतिष शास्त्र में बुध का स्त्रीलिंग है।

बुध ग्रह का संबंध बुद्धि से है। बुध ग्रह गणेश की पूजा से शुभफल होता है। इसलिए गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है। गुरुवार को आरती से गणेश जी उच्च तापमान पर-

गणेश आरती (गणेश जी की आरती)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पापा महादेवा।
एकदंत दयावन्त, चतुर्चारी।
मै तिलक सोहे, मूसे की हरड़.
पानपाई फूला देवी, और देवी मेवा।
लड्डूअन का भोजनालय, सन्त सेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पापा महादेवा।
अँधे को आँख दे, कोढ़िन को काया।
बेंज़ोन को पुत्र देत, निरधन को माया।
सुर श्याम शरण, सप कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पापा महादेवा।
दीन की लाजों, शम्भु सुतवारी।
सन्ध्या को पूर्ण करो, जगबलीरी।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पापा महादेवा।

गणेश के 108 नाम (गणेश के 108 नाम)
? इन कोनो मंत्र मंत्र से जाप से गणेश जी का आर्यवाद प्राप्त होता है।
1- बालगणपति
2- भालचन्द्र
3- बुद्धिनाथ
4- धूम्रवर्णा
5- एकाक्षरी
6- एकदंती
७- गजकर्ण
8- गजानन
9- गजनान
१०- गजवक्र
११- गजवक्त्र
12- गण अध्यक्ष
१३- गणपति
14- गौरीसुत
15- लंबकर्ण
16- लम्बोदर
17- महाबली
18- महागणपति
19- महेश्वर
20- मंगलमूर्ति
21- मूषकवाहन
22- निदिश्वरम
23-पहलीेश्वर
24- शूपर्ण
25- शुभम
26- सिद्धिदाता
२७- सिद्धविनायक
28- सुरेश्वरम
29- वक्रतुंड
३०- अखुरथ
31- अलंता
३२ अमित
३३-अनन्तचिद्रम
34- अवनिषी
35- अवघ्न
36- भीम
37- भूपति
38- भुवनपति
39- बुद्धि प्रिय
४०- बुद्धि विधाता
४१- चतुर्भुज
42- देवदेवी
४३- देवनाशकारी
४४- देवव्रत
४५- देवेन्द्राशिक
46- उपयोगी
47- दूरजा
४८- द्वैमातुर
४९- एक दंशस्त्री
५०- ईशानपुत्र
51- गदाधरी
५२-गण अध्यक्ष
53-गुणिन
५४- हरिद्र
५५- हर्ब
56-कंपाइल
57- कविषी
58- कीर्ति
59- कृपाणकरी
60- कृष्णपिंगाक्ष
६१- क्षेमंकारी
62- क्षिप्रा
63- मनोमय
64-मृत्युंजय
65- मृद्लेखम
६६-मुक्ति
67- नादप्रतिष्ठित
68- नमस्ते
69- नंदन
70- पाषाण
71- पीतांबर
72- प्रमोद
73- पुरुष
74- खूनी
75- रुद्रप्रिय
७६- सर्वदेवत्मन
77- सर्वसिद्धांत
७८- सर्वात्मान
79- शांभवी
८०- शशिवर्णम
८१- शुभगुणकान
82- श्वेता
83- सिद्धिप्रिय
८४- स्कंदपूर्वज
85- सुमुख
८६-स्वरूप
87- तरुण
८८- उदण्ड
८९- उमापुत्र
90- वरगणपति
९१- वर परिवार
९२- वरदविनायक
93- वीरगणपति
९४- विद्यावारिधि
95- विघ्नहर
96- विघ्नहर्ता
97- विघ्नविनासन
98- विघ्नराज
99- विघ्नराजेंद्र
१००- विघ्नविनाशाय
101- विघ्नेश्वर
१०२- विकट
१०३- विनायक
१०४- विश्वमुख
१०५- यज्ञकाय
106- यशस्वर
१०७- यशस्विनी
१०८- योगाधिप

गणेश जी के मंत्र
गण गणपतये नम:
वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्य सम्प्रभ। निविघ्नं कुरू मे देव सर्व कार्यषु सर्वदा।।
ॐ एकदंताय विद्याधंहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्

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