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श्रीमान हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रखा है। अपने लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने इस हैवानियत से हत्या की और आखिरी ठिकाना दिया, वह सिहरन पैदा करता है। मुंबई में रहने वाला श्रद्धा वॉकर अपने दोस्त आफताब अमीन पूनावाला के साथ दिल्ली में लिव-इन में रहता था। आफताब ने गर्लफ्रेंड श्रद्धा की हत्या कर उसके शव को 35 मोह में कर दिल्ली के अलग-अलग पहुंच में ठिकाने लगाया।

इस हत्याकांड ने दिल्ली में 27 साल पहले हुई नैना साहनी हत्याकांड की याद दिला दी है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने वाले 29 साल की नैना साहनी कांग्रेस नेता थे। कांग्रेस में ही युवा नेता सुशील शर्मा से पहली झलक मिलीं, फिर प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली। दोनों गोल मार्केट स्थित एक घर में पति-पत्नी की तरह रहने लगे। लेकिन प्रेमी से पति बने सुशील शर्मा ने 2 जुलाई, 1995 को तीन गोली मारकर नैना की हत्या कर दी, जब उसे यह आशंका हुई कि नैना के किसी पुराने दोस्त से अवैध संबंध हैं। इससे पहले दोनों के बीच खटास तब बढ़ गया था, जब नैना ने अपनी शादी सार्वजनिक करने के लिए सुशील शर्मा पर दवाब बनाना शुरू कर दिया था।

सुशील को अवैध संबंध का था शक:

दोनों के बीच अक्सर बात होने लगी। इससे तंग आकर नैना ने विदेश जाने का फैसला कर लिया। वह कॉमर्शियल पायलट बनना चाहता था। इसी की पढ़ाई उसने की थी। इसके लिए नैना ने अपने पुराने दोस्त से शिकायत की थी। उस रात भी उसी आवास में नैना की और उसके पुराने दोस्त मतलूब करीम से फोन पर बात हो रही थी, तभी सुशील शर्मा के घर में एंट्री हो गई। सुशील शर्मा ने बाद में रिडायल किया तो उन्हें करीम की आवाज सुनाई दी। इससे सुशील शर्मा भड़क गए और उनकी सर्विस रिवॉल्वर से नैना पर हस्ताक्षर किए गए।

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सुशील शर्मा ने नैना को मारी थी तीन गोलियां:

गलती में तुम टूटे हुए सुशील ने तब नैना पर तीन गोलियां दागी थीं। शिकार बना ही नैना सुशील के सामने उलझ गया था लेकिन अफसोस की बजाय सुशील शर्मा नैना की लाश को ठिकाने लगाने की जुगत में जीत गया। सुशील ने पहले नैना की डेडबॉडी को प्लास्टिक में लपेटा, फिर उसे बड़ी चादर में बांध दिया और उसे अपनी कार की डिक्की में रख दिया। यमुना में ठिकाने लगाने के उद्देश्य से सुशील यमुना की तरफ निकल पड़ा लेकिन निजामुद्दीन ब्रिज पर अधिक ट्रैफिक होने की वजह से ऐसा नहीं कर सका।

रेस्टोरेंट के कर्मचारियों को दिए गए थे 25-25 रुपये:

इसके बाद वह जनपथ के करीब अपने बिगिया रेस्तरां से संपर्क करता है। रेस्तरां पहुंचने वाले सुशील शर्मा ने अपने प्रबंधक केशव को बुलाया और सभी लोगों से रेस्तरां खाली होने का दावा किया। सभी कर्मचारियों को भी 25-25 रुपये देकर जल्द से जल्द घर भेज दिया। इसके बाद सुशील ने केशव की मदद से नैनी की लाश कार की डिक्की से शोर मचाया और उसे धधकते तंदूर के पास ले गए। दोनों ने मिलकर लाश को तंदूर के ऊपर रख दिया। चूंकि, तंदूर का मुंह छोटा था, इसलिए लाश उसके अंदर नहीं जा सकती थी। इसलिए चाकू से काटकर लाश को तंदूर में डालने लगा। लाश जल्दी जलने के लिए सुशील शर्मा ने केशव को जल्दी से मक्खन के चार बड़े पैकेट लाने को कहा था।

ऐसे फटा था भांडा:

उद्र, धधकते तंदूर की आग की लपटें तेज हो रही थीं। एक महिला ने आग लगा दी और चिल्लाने लगी। तभी उसकी आवाज गश्त कर रहे दिल्ली पुलिस के एक जवान अब्दुल नजीर कुंजू ने सुन ली। कुंजू ने तुरंत इसकी सूचना फायरब्रिगेड को दी और एसएमएस पर भेजी। वहां सुशील शर्मा बिगिया रेस्टोरेन्ट के बाहर गेट पर ही मुस्तैद था। अंदर जाने से मना करने लगा और बताया कि पार्टी का झंडा बैनर जला रहे हैं।

कुंजू को इस बात की आशंका है कि रेस्तरां के पीछे दीवार फांदकर अंदर पहुंचें। तंदूर के पास खड़े केशव ने यह भी बताया कि पार्टी के पोस्टर पोस्टर जला रहे हैं, लेकिन कुंजू को केशव का डर सता रहा है। उसने आग से बचने के लिए कहा, तो तंदूर देखकर कुंजू की जमीन पांव जमीन पर आ गई। वहां एक महिला की लाश जलाई जा रही थी। घेराबंदी से पूछताछ करने पर केशव ने बताया कि लाश सुशील शर्मा की पत्नी नैना साहनी की है।

तब लोगों ने तंदूर का आइटम खाना दिया था छोड़ दिया:

दिल्ली पुलिस के जवान ने तुरंत ये जानकारी अपने अधिकारियों को दी। तुरंत ये खबर आग की तरह दिल्ली की सियासी गलियारों से लेकर गली-मोहल्ले में फैली। इस घटना के बाद लंबे समय तक लोगों ने तंदूर का खाना खाना बंद कर दिया था। पहली बार इस मामले में डीएनए की जांच हुई थी। काफी दूर जाने के बाद 10 जुलाई, 1995 को सुशील शर्मा ने सरेंडर कर दिया था। 7 नवंबर 2003 को जिला अदालत ने सुशील शर्मा को विशेष सजा सुनाई थी। बाद में 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में सजा कर दिया। 2015 में सुशील शर्मा पैरोल पर बाहर आ गए और दिसंबर 2018 में उन्हें यह कहते हुए रिहा कर दिया गया कि उन्हें 23 साल की जेल की सजा दी गई है।

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