Panchaang Puraan

shardiya navratri 2022 puja vidhi shree durga chalisa lyrics in hindi

नवरात्रि: हिंदू पंचांग के आश्विन माह के शुक्लक्ल की तारीख से शारदीय तारीख हो जाती है। इस 26 से शुरू होकर शुरू करें। 4 अक्टूबर तक पर्व पर्व की स्मृति। इस पूरे 9 पूरे पर्व पर है। नवरात्रि के लिए प्रसन्नता के लिए भक्त की विधि- से अरा धनाएं हैं और व्रत भी हैं। नवरात्रि के हर घंटे श्री दुर्गा का पाठ अवश्य करें। श्रीदुर्गा का व्यवहार मनोविकृति में रहने वाले लोगों में हैं.

श्री दुर्गा चालीसा: नमो नमो धुरगे सुखकरी। नमो नमो दरगे दुख हरणी निरंकुशता को ठहराया जाता है। तिहुं लोक उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विक्राला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लै की। गोवध अन्न धन दिन अन्नपूर्णा जग पाला। तुम ही सुंदरी बाला॥

प्रलय काल सब नाशन हरि। तुम गौरी शिवशंकर शंकर शिव योगी। ब्रह्म विष्णु भगवान

सरस्वती को धारा। दे सुबुद्धि ऋषिमुनिउबारा॥ धरो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फ़्लिंगर खंबा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप ध्रोज माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं

क्षीरसिंधु में करत विलासा। दयासिंधु दीजै मन आसा हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावती माता। बगला बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छन्नन भाल भव दुःख निवारी॥

मकर, कुंभ राशि, धनु, मिथुन, राशि चक्र में शामिल हों ये छोटे सा उपाय, शनि के वास करने वाले से मुक्ति पाने के लिए

केहरी वाहन सोह भवानी। लंगूर वीर गति अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल भय भाजै॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला। शत्रु शत्रु हि शूला॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंसा बाजेत॥

शुंभ निशुंभ दिवस आप। रक्तबीज शंखन संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेही अघ भार माही अकुलानी

रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित आप तिहि संहारा॥ परी गाढ़ संन्यासी। भाई सहाय माटु तुम तो॥

अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सबाशा॥ न्यायोचित है। सदा पूजें नर-नारी॥

प्रेम भक्ति से जोगवां। दुख दारि निकटवर्ती नहिं अवेवन॥ ध्यानवे प जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छूत जाई॥

जोगी सुर मुनि कहतवादी। योग न बनना शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध विजेता सब लीनो॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति मन मन पछितायो॥

शरणागत कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भै प्रसन्ना आदि जगदंबा। दय शक्ति नहिं कीन विलंबा॥

मोको मातु अति कठिनो। तुम बिन कौन हरै दुख मेरो॥ आशा तृष्णा सतावन। रिपू मुरख मौही डरपावे॥

शत्रु नाश की रासायनिक शब्द। सुमीरौं ने पापा भवानी॥ कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला।

जब लग्जी दया फल पाऊ। यशो यश दुर्गा चालीसा जो कोई गाव। सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज। करहु कृपान जगदम्ब भवानी॥

दोहा शरणागत रक्षक, भक्तो नि:शंक।

मैं kayda तेrी rurण में में, rany लिजिये लिजिये अंक अंक अंक अंक

मैं इति श्री दुर्गा पूरी तरह से

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