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shardiya navratri 2021 date time how to get maa durga blessings dhanwane banne ke upay shree durga chalisa lyrics – Astrology in Hindi – मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए नवरात्रि में रोजाना करें ये काम, दूर होंगे दुख

शारदीय नवरात्रि 2021 : शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 7 शुरू हो रहा है। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। , नवरात्रि के बाद भी व्रत करते हैं। माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए श्री दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें। दुर्गा चालीसा का पाठ से दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आगे आगे, श्री दुर्गा चालीसा…

श्री दुर्गा चालीसा: नमो नमो धुरगे सुखी. नमो नमो दरगे दुख हरणी निरंकुशता को ठहराया जाता है। तिहुं लोक उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विक्राला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लै की। गोवध अन्न धन दिन अन्नपूर्णा जग पाला। तुम ही सुंदरी बाला॥

प्रलय काल सब नाशन हरि। तुम गौरी शिवशंकर शंकर शिव योगी। ब्रह्म विष्णु भगवान

सरस्वती को धारा। दे सुबुद्धि ऋषिमुनिउबारा॥ धरो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फ़्लिंगर खंबा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप ध्रोज माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिंधु में करत विलासा। दयासिंधु दीजै मन आसा हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावती माता। बगला बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छन्न भाल भव दुःख निवारी॥

केहरी वाहन सोह भवानी। लंगूर वीर गति अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल भय भाजै॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला। शत्रु शत्रु हि शूला॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंसा बाजेत॥

शुंभ निशुंभ दिवस आप। रक्तबीज शंखन संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेही अघ भार माही अकुलानी

रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित आप तिहि संहारा॥ परी गाढ़ संन्यासी। भाई सहाय माटु तुम तो॥

अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सबाशा॥ ज्यों का त्यों बना हुआ है। सदा पूजें नर-नारी॥

प्रेम भक्ति से जो यशोगान। दुख दारि निकटवर्ती नहिं अवेवन॥ ध्यानवे प जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छूत जाई॥

जोगी सुर मुनि कहतवादी। योग न आधार बनाना शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध विजेता सब लीनो॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति मन मन पछितायो॥

शरणागत कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भै प्रसन्ना आदि जगदंबा। दय शक्ति नहिं कीन विलंबा॥

मोको मातू अति कठिनो। तुम बिन कौन हरै दुख मेरो॥ आशा तृष्णा सतावन। रिपू मुरख मौही डरपावे॥

शत्रु नाश की रासायनिक शब्द। सुमीरौं ने पापा भवानी॥ कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला।

जब लग्जी दया फल पाऊ। यशो यश दुर्गा चालीसा जो कोई गाव। सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज। करहु कृपान जगदम्ब भवानी॥

दोहा शरणागत रक्षक करे, भक्तो नि:शंक ।

मैं आया तेरी शरण में, मातु लिजिये अंक।

मैं इति श्री दुर्गा पूरी तरह से

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