Panchaang Puraan

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शनि की धूपसाती से हर एक रसायन विज्ञान है। शनि की साढ़ेसाती लगने पर व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ समय बाद, यदि आप किसी भी समय मीन राशि पर हों, तो सही समय पर ऐसा करना शुरू करें। संपत्ति के हिसाब से भविष्य की गणना करने के लिए हनुमान जी की गणना करें। हनुमान जी की कृपा से पूरी तरह से ठीक हो रहे हैं। हनुमान जी के हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान् हनुमान और माता सीता के नाम का हनुमान्… जो व्यक्ति नियम से रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसे जीवन में किसी भी तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है।

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  • श्री हनुमान चालीसा-

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारना।

बरनौ रघुबी जसु, जोबड़मलुलु फलचारि।।

बुद्धिमान तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

जय कपिस तिहुं लोक सभा।।

रामदूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नाम।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कान केलकुंड केसा।।

बजर औ ध्वजा बिराजै।

कांधे मुंज जनेऊ साजै।

स्नीकर सुवनमन्दन।

तेज प्रताप महाजज बंधन।।

विद्या गुनी अति चतुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु की विशेषता सुनिबे कोसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म धरि सिंयधवा।

बिट रूप धारी लंक जरावा।।

भीम रूप धारी असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे।।

जीवन जीवन लखन जियाये।

श्रीरघुबीर हरि उर लाये।।

रघुपति कीह्न बड़ाई.

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ वातावरण में।।

सनकदिक ब्रह्मदि मुनिसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिग्पाल जहां रहते हैं।

कबी कोबिद कहलाते हैं..

आप उपकार सुगौरवहिं.

राममिलन राज पद दीन्हा।।

हरो मंत्र बिभीषन।

लंकेस्वर भे सब जग जाओ।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मुख्‍य महिने।

जलधि लांघी अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज के जेते।

आस-पास के वातावरण

राम दारे तुम रखवाले।

नत आदेश बिनु पैसा रे हो।।

सुखी रहती है सबना।

तुम काहु को भय ना।।

आपन सुधारो आपै।

सो लोक हांक तें कांपै।।

भूत भूत निकटवर्ती नहिं.

महावीर सुनाना…

नासिक रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतरता हनुमत बीरा।।

आपदा

मन-बच्चा ध्यान जो योग्य।।

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज कुल साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप।

सिद्ध है उजियारा।।

सुचना-संत के तुम रखिए।

असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि धन राशि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता..

राम रसायन तुम्‍हारे पासा।

सदा रघुपति के दासा।।

तुम भजन राम जी को पावै।

जनम-जनम के दुःख बेस्रावै ।।

अंतकाल रघुबर पुर जाई।

जहां जन्मा हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरी।

हनमत सेई सरब सुख करई।।

आपदा कट मित्त सबेरा।

जो सुमिरन हनुमत बलबीरा।।

जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई.

लहि बंदी महा सुख होई।।

जो यह हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

की जै नाथ हृदयस्पर्शी ..

दोहा :

पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसु सुर भूप।।

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