Panchaang Puraan

shani dev sade sati and dhaiya period upay remedies

इस समय धनु, मकर राशि पर शनि की दिशा में चलना है। शनि … सप्तमी का दिन शनिदेव को समर्पित है। इस शनिदेव की पूजा का महत्व अधिक है। शनि के दैत्याकार रत्न से मुक्ति के लिए दशरथ कृति सनस्तोत्र का होना चाहिए। कार्यशैली के इस स्तोत्र का पाठ से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

आगे पढ़ें राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र…

राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र
नम: कृष्णाय नीली शितिकण्ठनिभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।


नमो निर्मांस शरीर दीर्घश्मश्रुजताय च।
नमो विशालनेत्रेय शुद्रोदर भयाकृते।।


नम: पुष्कलगात्रेय स्थस्थलरोम्नेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घाशुष्काय कालदस्त्र नमोस्तुते।।

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्य वै नम:।
नमो घोर रंध्रराय भीशिक्षाय कपालिने।।


सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तु नमस्तेते।
सूर्य नमस्कारऽस्तु भास्करे डरदाय च।।

शनि के मार्गी होने से इन राशियों को कॉन्फ़िगरेशन, प्रभाव से होने वाला प्रभाव

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोस्तुते।।


तपस दग्धधर्माय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं युग्मक अतृप्ताय च वै नम:।।


ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपतमज सूनवे।
तुष्टो ददास वैसी राज्यं रुष्टो हरशिशुक्लत।।


देवासुरमनुष्यश्च सिद्घविद्या धरोरागा:।
त्वया विलोकिता: सर्व नाशंति समूलत:।।


प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत।
और स्तुस्तद सौरभौराजो महाबल:।।

Related Articles

Back to top button