Panchaang Puraan

Shani Amavasya 2021 : kab hai shanishchari amavasya puja vidhi shani mantra totke upaye shani chalisa – Astrology in Hindi

शनि अमावस्या 2021 : दैनिक मासिक की अमावस्या 4 दिन की तारीख। विश्व में अस्वीकृत अमावस्या का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। शनि अमावस्या या शनैश्चरी अमावस्या भी कहा गया है। शनि अमावस्या के दिन, स्नान और पूजा-पाठ आदि के जीवन के दोष समाप्त हो गए हैं।

धूप के मामले में विशेष प्रकार के उपाय करने से आपको लाभ मिलता है।

1. हनुमान् चालीसा का पाठ:- शनैश्चरी अमावस्या के दैवीय चालीसा का पाठ लाभप्रद है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने और स्वस्थ होने से ठीक हो जाता है।
2- इस बार के सूर्य के प्रकाश में सूर्य नमस्कार करें।
3- हेजल की नाल के घर के अंदर की सफाई के लिए सही तरीके से व्यायाम करें।
4- यह भी कहा गया है कि यह एक अच्छी चीज है। 5- शाम को पश्चिम की ओर बत्ती कर तेल का दीपक जलाएं। ‘ॐ शं शनैश्चराय नम:’ मंत्र मंत्रमुग्ध कर दें।
6- शनैश्चरी अमावस्या के पीपल के पेड़ में विशेष विशेष पौधा होता है। पीपल पर जल पदार्थ। पीपल के संक्रमण में… अमावस्या के पीपल की पूजा करके आप कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पीपल की सुंदरता को भी अच्छा लगता है।
7- शनिदेव की सप्तऋषि के दिन पीपल का लगाने इस शनि ग्रह से बचने के लिए ऐसा करें।

जीन्स जेमियनो में कारक कारक है जो लोगो को साढी में बदल देता है। वृष, तू, मकर, कुम्भ राशि के लिए युवा साढेसाती शुभ फल पल रहे हैं। प्रकृति के आधार पर ही फल फल या अधिक मात्रा में प्राप्त होते हैं। इस प्रकार के काम करने वाले ‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍के साथ में यह ‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍

सूर्य ग्रहण 2021 : शनि अमावस्या पर सूर्य नमस्कार, ये कार्य से लाभ होगा

शनि अमावस्या पर शनिदेव चालीसा पाठ

|| दोहा ||
जय गणेश गिरी सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुन विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज

|| चौपाई ||
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तिन प्रतिपाला॥
चारि बंता, तनु श्याम विराजै। मै रतन कुटछबिजै॥

परम विशाल भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विक्राला॥
कुण्डल श्रावण चमाचम चमके। हिय माल मुक्त मणि धमके

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करन अरिंहंगा संहार॥
पिंगल, कृष्णो, श्वेत नन्दन। यम, किंस्थ, रौद्र, दुखभंजन

सौरी, मण्ड, शनि, दश नामा। भानु पूज
जा पर प्रसन्नता हो रही है। रंखुँ रे

पर्वतहु तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारती
राज मिलत बन रामहिंयो। कैकेइहुँ की मति हरि लींयो॥

मृगकप दिखाई दे रहा है। मातु जानकी पूरी तरह से
लखन व्‍यक्‍ति विक्‍लीकिडारा। मचिगा दल में हाकारा॥

रान की गति-मती बौराई। रामचन्द्र सों बैर
दियो की तरह कंचन लंका। बजरंग बीर का डंस

नृप विक्रम पर तुहि पग धारा। चित्रमयूर
डर्कलखा लागियो पायर डरवायो तोरी॥

महान दशा निकृष्ट प्रदर्शितयो। तेलिहिं
विनय दीपक महं कीन्यों। खुशियों के लिए खुश खुशियाँ दीनय॥

हरिश्चन्द्र नृप नारी बिकानी। घर घर पानी॥
तैसे नल पर दशा दशा। भूंजी-मीन स्लड पानी॥

श्री शंकर अँग्रेज़ी पार्वती को सती॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभउलि गयो गौरीसुत सीसा॥

पांडव पर भैदस की स्थिति। बची द्रौपदी होति उघारी॥
कैरव की गति गति मारयो। युद्ध महाभारत करि

सूर्य कहँ मुख महँ धारी। डिल्डि परोलो पाताल
शेष देव-लखि विनती लाई। सूर्य को मुख्य टीवी टीवी

वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग गर्दभ मृग स्वान
जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल सत्य कहतवादी॥

गज वाहन लक्ष्मी घर आवैं। हय ते सुखी सम्पादित फसलें
गर्ल करै मल्टी काजा। सिंह सिद्धकर राज सोसाइटी

जॅमबस्ट खराब कर रहा है। मृग द अडच प्राण संहारै॥
जबाव व्‍यवस्‍था प्रिय अन्य भयभय

तैसहि चारी चरण यह नाम। सोने की चाँदी अरु ताम
जब तक प्रभु आवैं। धन जन बर्बादी भुगतान॥

समता ताम्र शुभकारी। गोल्डन सर्व सर्व सुखी मंगल
जो यह शनि वैशिष्ट्य नित गावै। कबुं न दशा निकृष्ट सतवै॥

अविश्वसनीय नाथ चालं लीला। शत्रु के नशि बली ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधि शनि ग्रह ग्रह॥

पीपल शनि दिन में। दीप दिवस द्वि बहु सुख पावत
कहत राम सुन्दर दासा। सन सुमित सुख प्रकाश प्रकाश

|| दोहा ||
पाठ शनिश्चर देव को, ‘भक्त’ तैयारी।
करत पाठ चालीसवें दिन, हो भवसागर पर

(इस जानकारी में यह जानकारी है।)

.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button