Panchaang Puraan

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मासिक कालाष्टमी व्रत: हर तारीख को तारीख़ का तारीख तय हो गया है। पावन भैरव बाबा विधि- व्यवस्था से व्यवस्था- इस प्रकार की व्यवस्था है। भैरव बाबा की कृपा से बचने वाला व्यक्ति भी जीवन में किसी भी प्रकार का है. सावन माह में 31 जुलाई। पावन दिन भैरव बाबा . इसा के पाठ से भैरव बाबा की कृपा प्राप्त होती है I

सावन का पहला पहला कल, मकर, कुंभ, धनु, मिठाइयां और लोग जरूर देखें ये छोटे सा उपाय

  • श्री भैरव चालीसा

दोहा

श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि मठ।
चालीसा वंदन करो श्री शिव भैरवनाथ॥
श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल।
श्याम वरण विकराल वपुलन लाल विशाल॥

जय जय श्री काली के लाला। जयति जयति काशी-कुतवाला॥जयति बटक-भैरव भय हारी। जयति काल-भैरव बलकारी॥
जयति नाथ-भैरव विख्यात। जयति सर्व-भैरव सुखदाता॥
भैरव रूप कियो शिवलिंग। भव के भार
भैरव रव सुनि हवै भय दूर। सब विधि होय
शेषेशा आदि गायो। काशी- कोतवाली कहलायो॥
जटा जूट शिर चंद्र विराजत। बाला कुट बिजायत साजत॥कटि करधनी घुंघरू बज़त। दर्शन करत सकल भजत
जीवन दास को दिन्यो। कीन्ह्यो कृपानाथ नाथ छिन्‍यो:
वसीना बनी सारद- काली। दिन्यो वर मम लाली
धन्य धन्य भैरव भय भंजन। जय मनरंजन खल दल भंजन
कर त्रिशूल डंबरू शुचि कोड़ा। कृपाण कटाक्ष सुयश नहिं थोडा॥
जो भैरव निभय गावत। अष्टसिद्ध सिद्धि नव धन फल पावतीरूपम अपार संकट मोचन। रोमांच कराल लाल दुहुंलोन लोच
अगणित भूत प्रेत संग डोलत। बम बम बम बम बम बलत बोल
रुद्रकाय काली के लाला। महा कालहू के हो काला॥
बट नाथ हो काल गंभीर। श्वेत रक्त अरु श्यामा शरीर॥
करत नीनहूं रूप प्रकाशा। भरत सुभक्त कहं शुभ आशा॥
रत्न जड़ित कंचन सिंहासन। व्याघ्र चरम शुचि नर्म सुआन॥ तुमहि जय काशिहिं जन ध्यावहिं विश्वनाथ कहं दर्शन पाव॥्ग
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय। जय हर उमा नन्द जय॥
भीम त्रिलोचन स्वान के साथ जय। वैजनाथ श्री जगतनाथ जय॥
महा भीम भी सामाजिक जय हो। रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय॥
अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय। स्वानरुढ़ सयंचंद्र नाथ जय॥
निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय। गहत अनाथन नाथगण जयात्रेशलेश भूतेश चंद्र जय। रोमांच वत्स अमरेश नन्द जय॥
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय। डयूटी कीर्ति प्रचण्ड जय॥
रुद्र बटुक द्रेश कालधर। चक्र तुण्ड दश पाणिवल धरी
करि मद पान शम्भुगावत। चौंसठ योगिन संग नचावत॥
करत जन पर बहु. काशी कोतवाली अड़बंगा॥
दं काल भैरव जब सोटा। नसैस पाप मोत से मोतनजनकर निर्मल होय शरीर। मेरा सकल संकट भव पीरा॥
श्री भैरव भूतों के राजा। हरत करत शुभ काजा॥
ऐलादी के दुख निवार्यो। सदा कृपाकरी का सम्पादकीय॥
सुंदर दास सहित अनुरागा। श्री दुरवासा निकटवर्ती प्रयागा॥
श्री भैरव जी की जय लेख्यो। समग्र पूरण देखना

जय जय जय भैरव बटकुट स्थिति रिपोर्ट।
कृपा दास पर शंकर के आवर्तन॥

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