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Sawan Kitne Tarikh Se Chalega Know Sawan Mass Start 2021 In Hindi And 108 Names Of Lord Shiva

सावन 2021: पंचांग के अनुसार 24 नवंबर 2021, कोषाढ़ मास का होने जा रहा है। पिछले 25 नवंबर से श्रावण मास यानि सावन का मौसम शुरू हो रहा है। सावन का सबसे प्रिय सामान्य सामान्य है। सावन के पूरे होने पर. स्वस्थ होने के लिए सावन में सेक्स करने की क्रिया की पूरी पूजा करें।

25 जुलाई का पंचांग (25 जुलाई 2021, पंचांग)
25 नवंबर को श्रावण मास की प्रतिपदा तिथि है। इस कार्य को करना है। यानि शुभ योग में श्रावण मास का आरंभ हो रहा है। इस दिन मकर राशि में विराजमान ज्योतिष। जहां पर शनि भोजन करते हैं।

सावन सोमवार, 26 जुलाई (सावन सोमवार 2021)
सावन का पहला पहला 26 जुलाई। सावन मास में मंगलवार की पूजा का विशेष महत्व है। इस उत्सव के दौरान शिव की पूजा की जाती है। शवन में शिव के 108 का जाप करना शुभ होता है। शिव के 108 नाम-

गोशिव के 108 नाम (भगवान शिव के 108 नाम हिंदी में)
1. शिव: कल्याण स्वरुप
2. महेश्वर: माया के अधीश्वर
3. शंभू: आनंदमय स्वरुप
4. पिनाकी: पाक धनु राशि वाले
5. शशिशेर: सह
6. वामदेव: बेहद सुंदर स्वरुप
7. विरूपाक्ष: चमत्कारी आंख की आंखें
8. कपार्दी: जटा ढलने वाला
9. नीललोहित: लाल रंग का रंग
10. शंकर: सबका कल्याण
11. शूलपाणी: तालिका में त्रिशूल कोरिंग
१२. खटवांगी: खोटिया का एक फ़लक रखने
13. विष्णुवल्लभ: विष्णु के अति प्रिय
14. शिपिविष्ट: सितुहा में प्रवेश करें
15. अंबिकानाथ: देवी भगवती के पति
16. श्रीकण्ठ: सुंदर कण्ठ मित्र
17. भक्तवत्सल: स्वादिष्ट को अत्यंत स्नेही करने
18. भव:संसार के रूप में होने वाले होने
19. शर्व: अडचनों को नष्ट करना
20. त्रिलोकेश: लोकों के स्वामी
21. शितिकण्ठ: सफेद ण्ठ
22. शिवप्रिय: पार्वती के प्रिय
23. उभयचर: असाधारण रूप से तैयार
24. कपाली:कोलिंग कोरिंग
25. कामरी: कामदेव के शत्रु, हरने के प्रति संवेदनशील
26. सुरसूदन: अंधक दैत्य को मारवाड़
27. गंगाधर: गंगा को जटाओं में ढलना
28. ललाटा: मै पर आँख का कॉर्टिंग
29. महाकाल: काफोड के भी काल
30. कृपानिधि: करुणा की खान
31. भीम: भयावहता या रुद्र रूपी
32. परशुहस्त: तालिका में फरसा कॉरिंग
33. मृगपाणी: हिरन का मांस खाने वाले
34. जटाधर:
35. कैलासिर आवासीय: कैलाश पर निवास स्थान ️️️️️️️️️️️️️️️️
36. कची: कॉरिंग करने
37. हार्डी: बेहद खूबसूरत देह
38. अंतःस्रावक: सुर का विनाशकारी
39. वृषांक: बैल-चिह्न की ध्वजा
40. वृषभ राशि वाले: बैल पर सवार होने वाला
४१. भस्मोद्धूलितविग्रह: भस्म शेंक
42. साम्प्रदायिक प्रेम: आमजन से प्रेम प्यार
43. स्वरमय: सातों स्वरों में रहने वाले
४४. त्रिमूर्ति: वेद रूपी विग्रह से ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️
45. अनीश्वर: जो स्वयं को अप्रिय है स्वामी है
46. ​​सर्वज्ञ: सब कुछ अंश जानने
47. महात्वाकांक्षा: सब मुसीबत में
48. सोमसूर्यग्निलोचन: चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख
49. हवि:आहुति रूपी द्रव्य
50. यज्ञमय: यज्ञ स्वरूप
51. सोम: उमा के सहित रूपी
52. पंचवक्त्र:पाचक मुख वाले
53. सदाशिव: नित्य कल्याण रूपी
54. विश्वेश्वर: विश्व के ईश्वर
55. वीरभद्र: और वीर शान्त स्वरुप
56. गणनाथ: गणों के स्वामी
57. प्रजापति: प्रजा का पालन-पोषण करने वाले
58. हिरन्यरेता: सुनहरा तेजा
59. दुर्धुर्ष: किसी से नानी वाले
60. बैरीश: पर्वत के स्वामी
61. गिरीशेश्वर: कैलाश पर्वत पर रहने
62. अनघ: पाप कीटाणुरहित या पुण्य
63. भुजंगविस्फोट: स्नापों और नागों के गहने पहने हुए
64. भर्ग: पापों का नाशिंग
65. गिरिधन्वा: मेरू पर्वत को धनुष बना
66. गिरीप्रिय: पर्वत को प्रेम प्यार
67. कृत्तिवासा: गुज़र्म का उपयोग करते हुए
68. पुराण: पुरों का नाश करने वाला
69. सुश्रुत: सर्वसमर्थ ऐश्वर्य स्पीरिट
70. प्रमथाधिप: प्रथमगणों के अधिपति
71. मृत्युंजय: मृत्यु
72. सूक्ष्मतनु: सूक्ष्म शरीर
73. मौसम के अनुसार संशोधित:
74. जगत् के गुरु
75. विकमकेश: आकाश रूपी बाल
76. महासेन्सर: कार्तिकेय के पिता
77. चारुविक्रम: सुन्दर परक्रम
78. रूद्र: देशद्रोही
79. भूतपति: भूतप्रेत व पंचभूतों के स्वामी
80. स्थूल कण: स्पंदन विहीन कूटस्थ रूपी
81. अहिर्बुध्न्या: कुंडलिनी कॉर्टिंग ️ .️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️
82. दिगंबर: अग्न, आकाश रूपी वस्त्र
83. अष्टमूर्ति: आठ रूपी
८४. बहुसंख्यक: अनेक
85. सात्त्विक: सत्वगुणी
८६. शुद्धविग्रह: दिव्यमूर्ति
87. प्रकृति:
88. खांडपरशु: टूटा हुआ फरसा कॉर्टिंग
89. आज: जन्महीन विहीन
90. पावि मोचन: सलेक्शन सेने
91. मृड: सुखस्वरूप
92. पशुपति: स्वामी के स्वामी
93. देव: स्वयं प्रकाश रूप
94. महादेव: देवों के देव
95. अव्यय: खर्च होने पर भी घटाया गया
96. हरि: विष्णु समरूपी
९७ .पूषदंतभित: पूषा के दांतने
98. अव्यग्र: व्यथित न होन
99. दक्षध्वरहर: दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाला
100. हर: पापों को हरने
१०१. भगनेत्रभिद: भग देवता की आंख फूटने
102. अव्यक्त: इंद्रियों के रोग न होने वाले
103. सहस्रक्ष: अनंत आँखे
१०४. सहस्रपाद: अनंत पायरी
105. अपवर्ग परिवार: मोक्ष देने
106. अनंत: देशकाल वस्तु रूपी परिच्छेद से विहीन
107. तारक: तारने वाले
108. ईश्वर: ईश्वर

यह भी आगे:
सावन 2021: गजकेसरी योग और बुधादित्य योग क्या है? 26 कोस्क में ये ‘राजयोग’ हैं

सूर्य ग्रह 2021: वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह नक्षत्र ग्रह ग्रह नक्षत्र ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह ग्रह नक्षत्र वर्ष वर्ष वर्ष कैसा ग्रह ग्रह है।

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