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Sawan 2021: Sawan month will start from 25th July know what to offer and what not to Lord Shiva during worship – Astrology in Hindi

आषाढ़ मास में सावन है। सावन का महीना इस साल 25 नवंबर से शुरू हो रहा है। सावन को श्रावण मास भी कहा जाता है। सावन मास शिव को समर्पण। गर्दन भी भोलेनाथ का दर्द होता है। ऐसे में हिंदू धर्म में शनि का विशेष महत्व है। सावन मास के मस्तक को शंकर के जलभिषेक का विशेष महत्व है। सोमवार ????

सावन मास में शकर को देखें-

1. शुकशंकर को अहम् प्रिय है। इसलिए सुश्रुत शंकर की पूजा में शुक्ष्णता विशेष रूप से अच्छी होती है। सावन में शिवलिंग के समय. सावन में शंकर का दूध से रूद्राभिषेक से मनोवृत्ति वाले व्यक्ति के बच्चे होते हैं।
2. सावन मास में शंकर को धरा, बेलापत्र, चंदर, भांगतू, केशत, शुक, दही, घाव, गंगाजल, अति आवश्यक रूप से आवश्यक है।
3. सुगन्धद्रष्ट्र आक का लाल और शुष्क संवेदी वातावरण को शुभ माना जाता है । फूलों

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शुक शंकर को नासूर ये पद-

1. शुकशंकर केतकी और केव धुंए का ख़्याल रखें।
2. महादेव की पूजा में शामिल हों।
3. विज्ञान के हिसाब से, भोलेनाथ की पूजा में तुलसी दल भी इस्तेमाल किया गया था।
4. शिव जी.
5. शिव कोलोली या कुमकुमाइट आउट। भोलेनाथ को

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मंगल को संबोधित करते हुए शिव को प्रभावित करते हैं।

प्रथम मंगल: 26 नवंबर, धनास्त नक्षत्र। शक् त दूध से प्रात: काल शिव जी का अभिषेक करें। सायंकाल शिव-पार्वती का प्रतिद्वंदी।
दूसरा मंगल : 2 अगस्त, कृतिका नक्षत्र। अलार के रस से शिव जी का प्रार्थना करें।
मंगल मंगल: 9 अगस्त, आकाशा नक्षत्र। शिवजी का दूध से अभिषेक कर चंदन का ले और शेष चंदन को मे पर।
चौथा मंगल : 16 अगस्त, अनुराधा नक्षत्र। शहद कर

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