Panchaang Puraan

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25 जुलाई से शुरू हो रहा है। 22 अगस्त तक सावन का औसत। पहली कल कल 27 जुलाई को है। अंतिम दिन का हनुमान जी। हनुमान जी शिव के 11 वें स्थान पर रुद्रावर्तक हैं। हनुमान जी श्री राम के सबसे बड़े भक्त और इस कलयुग में देव हैं। हनुमान जी को माता सीता ने अमर-अमर की वरदानी दी है।

हनुमान कृपा व्यक्ति एच.जी. हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे आसान उपाय राम के नाम का सुमिरन है। जो भी व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से श्री राम के नाम का सुमिरन करता है वह व्यक्ति व्यक्तिगत व्यक्ति हैं। रुकने के स्थान पर रुकने के स्थान पर रुकने पर श्री राम के नाम का सुमिरन होता है।

ये जानने के लिए प्यार करने वाले, प्यार करने वालों को ध्यान दें

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए निश्चित रूप से हनुमान्‌ हनुमान् विष्णु का पाठ और श्रीमान् श्रीराम का नाम जाना चाहिए। ️ व्यक्ति️ व्यक्ति️ व्यक्ति️ व्यक्ति️️️️️️️️️️️️! हनुमान जी की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार के सुखों की उपस्थिति में हैं और दैत्य के वैकुंठ धाम में जगह है।

देवगुरु की वक्री चाल 14 तक अगर ये समझ में आता है, तो यह समझ से परे हो सकता है कि हम इसे कैसे समझें। ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️

श्री हनुमान चालीसा

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनुज मुकुरु सुधारना।

बरनौ रघुबी जसु, जोबड़मलुलु फलचारि।।

बुद्धिमान तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

जय कपिस तिहुं लोक सभा।।

रामदूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नाम।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कान केलकुंड केसा।।

बजर औ ध्वजा बिराजै।

कांधे मुंज जनेऊ साजै।

स्नीकर सुवनमन्दन।

तेज प्रताप महाजज बंधन।।

विद्या गुनी अति चतुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु की विशेषता सुनिबे कोसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म धरि सिय अध्यात्म।

बिट रूप धारी लंक जरावा।।

भीम रूप धारी असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे।।

जीवन जीवन लखन जियाये।

श्रीरघुबीर हरि उर लाये।।

रघुपति कीह्न बड़ाई.

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हारो गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ वातावरण में।।

सनकदिक ब्रह्मदि मुनिसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिग्पाल जहां रहते हैं।

कबी कोबिद कहलाते हैं..

आप उपकार सुगौरवहिं.

राममिलन राज पद दीन्हा।।

हरो मंत्र बिभीषन।

लंकेस्वर भे सब जग जाओ।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मुख्‍य महिने।

जलधि लांघी अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज के जेते।

आस-पास के मौसम आपस में जुड़ें।।

राम दारे तुम रखवाले।

नत आज्ञा बिनु पैसा रे हो।।

सुखी रहती है सबना।

तुम काहु को भय ना।।

आपन सुधारो आपै।

सो लोक हांक तें कांपै।।

पी भूतसाच निकटवर्ती नहिं अवै।

महावीर सुनाना…

नासिक रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतरता हनुमत बीरा।।

आपदा

मन क्रमबद्ध ध्यान ध्यान दें जो…

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज कुल साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप।

यह सिद्ध है उजियारा।।

सुयोग-संत के तुम रखिए।

असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि धन राशि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता..

रामा रसायन तुम्‍हारे पासा।

सदा रघुपति के दासा।।

तुम्हीं भजन राम कोवै।

जनम-जनम के दुःख बेस्रावै।।

अंतकाल रघुबर पुर जाई।

जहां जन्मा हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरी।

हनमत सेई सरब सुख करई।।

आपदा कट मित्त सबेरा।

जो सुमिरन हनुमत बलबीरा।।

जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई.

लहि बंदी महा सुख होई।।

जो यह हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

की जै नाथ हृदयस्पर्शी ..

दोहा :

पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसु सुर भूप।।

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