Panchaang Puraan

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सावन 2021 : सावन कावन चलने वाला है। सावन का मंतव्य शंकर को विश्वास है। इस कानून में – व्यवस्था से नाथ की पूजा- भोलेनाथ की पूजा है। 22 अगस्त तक सावन का एकमात्र नियम। सावन के हिसाब से हर व्यक्ति को अराधना करना चाहिए। सावन के भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए आरती और चालीसा…

  • शिव चालीसा

दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहतयोदास तुम, देहु अभय वरदानी॥

चौपाई
जय गिरिजा दीन दयाला। सदा करत सन्तान प्रतिपाला
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कान कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंगये। मुण्डमाल टैन
कपड़ा बाघ सोहे। इमेज को देखना नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवा दुलारी। बम अंग सोहत इमेज न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत इमेज ग्रेट। करत सदा हानिकारक क्षतशोधक॥
नंदी गणेश सोहैं कैसे दर्ज करें। समुद्र मध्य कमल जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या इमेज को कहि जात न काऊ॥
देवनाही विधिवत। ही दुःख प्रभु आप निवार
वायु प्रदूषण। देवन मिलि.
तुरत षडान आप पठाउ। लवनिमेष महँरी जीर्ण उ
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हारी व्यापक संसार॥
वारसुर सन युद्ध मचाई। सब्हिंजी कृपा कर लें बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब बौतासु पुरारी॥
दिनिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा गाई। अख्यात अनादिभाषी नाइ ॥
ग्रीष्मकाल में सम्मिलित हों। जरत सुरासुर भए विहार॥
कींनी दयां तहं करी सहाय। नीलकण्ठ नाम कहा जाता है
पपू रामचन्द्र जबकी। विजेता के लंक विभीषण दिन:
सहसकमलो में हो वरही। कीन्हाई परीक्षा
एक कमल प्रभु राहेउ जोई। कमल नपन चहं सोई॥
दैव रोग संकट प्रभुशंकर। भे प्रसन्ना वर
जय जय जय अविनाशी। करत कृपा सब के घटने वाले॥
अन्य सकल नित मोहि सतावै। व्यक्ति रयौं मोहि चैन न आवै॥
त्रे त्राहि मैं नाथारो। उबारा मोहि आणो॥
ल त्रिशूल शत्रु को मारो। संकट ते मोहि आ उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई। शिकायत में पूछताछ
स्वामी एक आसा है। आई हरहु मम संकट
धन धन को दे सदा हीं। जो पूरी जांच सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि विधान। क्षमहु नाथ अब फेल फील॥
शंकर हो संकट केशन। मंगल विघ्ननाशन॥
योगी यति मुनि पर्यावरण। शारद नारद शश नववन॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मदिक पार न पा
जो यह पाठ करे मन लाई। शंभु सहाय
अधिकारी जो कोई भी हों। पाठ करे सो पावन हरी॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसादी तेही होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान दें घर करवे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। तक तन नहीं रहा कलेश कल
धूप दीप नेवैद्यवे। शंकर सम्मुख पाठ सुनवे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अंत धाम शिवपुर में पावे॥
कह रहे हैं अयोध्या जानि सकल दुख हरहु॥

दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। मेरा मनोकामनाना, पूर्ण जगदीश
मगसरछठ हेमंत तु, संवत चौसठ जान। अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

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  • शिवजी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्म, विष्णु, सदाशिव, गंगा धारा॥
जय शिव ओंकारा

एकन चतुर्दशी पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे
जय शिव ओंकारा

दो भुज चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
जय शिव ओंकारा

वनमाला मुण्डमाला वारी.
कंसरी कंसारी कर मलिकारी॥
जय शिव ओंकारा॥

श्वेता अक्टूबर, बाघ अक्टूबर अंगे।
सनकदिक गरुणादिक भूतियादिक संगे
जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखी दुखहारी जगपालन फसली
जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्म सदाशिव जनत अववेका।
मधु- दोभ दोउ, सुरभयभय करे॥
जय शिव ओंकारा

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती गणेशांगी, शिवलहरी
जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर के खाने, भस्मी में वासा
जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन मलिका।
शेषनाग लेपवत, ओढ़त मृगछाला॥
जय शिव ओंकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठी दर्शन पावत, महिमा अति महान॥
जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोइनार गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
जय शिव ओंकारा॥

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