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Sankashti Chaturthi : गणपति के मूषकों ने रोक दी थी विष्णुजी की बारात 

<पी शैली ="टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफाई;">संकति चतुर्थी: रिपोर्ट के अनुसार संदेश है कि श्रीहरि विष्णु और माँ लक्ष्मी की संतान के लिए सभी देवी को आमंत्रित किया गया। यह आमंत्रण विष्णुजी की ओर से दिया गया था। जब तक अस्त होने की स्थिति में नहीं थी तब तक गणेशजी इस पर काबू पा चुके थे। वत में। देवताओं ने विष्णुजी से कारण पूछा तो भगवान ने कहा कि हमने पिता भोलेनाथ को न्योता भेजा है। गणेशजी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। अलग-अलग से न्योता लगाने की भी योजना नहीं है। ️ दूसरी️ दूसरी️ दूसरी️ दूसरी️ दूसरी️️️️️️️❤️️️️️️️️️️❤️❤️❤❤❤❤❤❤❤❤ अगर गणेश जी कोई बात नहीं। ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक पहले। 

तभी संभालते हैं तो यह पालने के लिए किया जाता है। सुझाई पसंद आने वाले लोग भी हमी भर दी. 

इस बीच गणेश जी कह रहे थे तो घर में रहने वाले को। बारात गतिशील तो नारदजी ने गणना की। विष्णु भगवान विष्णु ने कहा। क ️ गणमूक सेना ने आगे दी, बारात की रथ के पहिए धंस। सभी के । तो नारदजी ने कहा, कि आपने गणेश जी का मान नहीं किया। । <पी शैली ="टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफाई;">किसान ने दी को पढ़ा

रथ के बाद दर्ज किए जाने के बाद, ऐसे में प्रवेश करने से पहले, यह पढ़ना शुरू करने से पहले श्री गणेशाय नम: गणेश वंदना में होगा। ही ठीक करें। उस किसान ने कहा कि हे! आपने सर्वप्रथम गणेशजी को नहीं मनाया होगा और न पूजा की होगी, इसीलिए तो आपके साथ यह संकट आया है। प्रथम गणपति आक्रमण है।

गणेश चतुर्थी के दिन गणेश की पूजा की जाती है। गणेश जी की पूजा करने के लिए ऐसा करने के लिए, आपको ऐसा करने की आवश्यकता होती है। आज श्रावण माह की तिथि तिथि है। कि कल 9 बजकर 19 बजे तक. तारीख़ पूरा होने के बाद. इस भगवान गणेश की स्थापना का विधान है। जो कोई भी इस दिन श्री गणपति की उपासना करेगा। इसी के साथ बैठने की समस्या पैदा होने और संतान उत्पन्न होने के कारण।

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