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Read Hanuman Chalisa On Tuesday Hanuman Puja On 21st December Vastu Dosh Removed

हनुमान पूजा हनुमान चालीसा: हनुमान जी को संकट में डाल दिया गया है। खुश रहने के लिए अच्छा है। इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ जीवन में आने वाली परेशानियों को तो दूर करता ही है, साथ ही साथ घर के वास्तु दोष को भी दूर करता है।

हनुमान चालीसा (हनुमान चालीसा)
जय हनुमान ज्ञान गून सागर। जय कपिस तिहुं लोक संघ।।
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नाम।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कान केंद केकुंड केसा।।
बजर औ ध्वजा बिराजै। कांधे मुंज जनेऊ साजै।
स्नीकर सुवनमंदन। तेज प्रताप महाजज बंधन।।
विद्या गुनी अति चतुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु की विशेषता सुनिबे कोसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म धरि सिय अध्यात्म। बिट रूप धारी लंक जरावा।।
भीम रूप धारी असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।
जीवन जीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरि उर लाये।।
रघुपति कीह्न बड़ाई. तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हारो गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ वातावरण में।।
सनकादिक ब्रह्मदि मुनिसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिग्पाल जहां रहते हैं। कबी कोबिद कहलाते हैं..
आप उपकार सुगौरवहिं. राममिलियन राज पद दीन्हा।।
हरो मंत्र बिभीषन। लंकेस्वर भे सब जग जाओ।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मुख्‍य महिने। जलधि लांघी अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज के जेते। सुगम
राम दारे तुम रखवाले। नत आज्ञा बिनु पैसा रे हो।।
सुखी रहती है सबना। तुम काहु को भय ना।।
आपन सुधारो आपै। सो लोक हांक तें कांपै।।
पी भूतसाच निकटवर्ती नहिं वैकल्पिक। महावीर सुनाना…
नासिक रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतरता हनुमत बीरा।।
आपदा मन क्रमबद्ध ध्यान ध्यान दें जो…
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज कुल साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै…
चारों जुग परताप। यह सिद्ध है उजियारा।।
सुयोग-संत के तुम रखें। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि धन के धनी. अस बर दिन जानकी माता..
राम रसायन तुम्‍हारे पासा। सदा रघुपति के दासा।।
तुम्हीं भजन राम कोवै। जनम-जनम के दुःख बेस्रावै ।।
अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्मा हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरी। हनमत सेइ सरब सुख करई।।
आपदा कट मित्त सबेरा। जो सुमिरन हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई. लहि बंदी महा सुख होई।।
जो यह हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। की जै नाथ हृदयेश मंहश्वर..

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