Panchaang Puraan

ravivar ke upay surya dev remedies totke sunday puja vidhi tips surya chalisa lyrics – Astrology in Hindi – सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए रविवार को करें ये चालीसा, मान

क्रियाकलाप के क्रियाकलापों का संगठन सूर्य को समर्पित है। इस दिन विधि- व्यवस्था से सूर्य की पूजा- कृप्या। ज्योतिष में सूर्य देव को कहा जाता है। सूर्य देव के शुभ प्रभाव से व्यक्ति का जीवन आनंदमय हो सकता है। सूर्य देव की दृष्टि से व्यक्ति विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों की तरह होते हैं और मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करते हैं। सूर्य देवता के लिए यह परमेश्वर के लिए आवश्यक है। सूर्य के चालीसा का पाठ से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है I

9 से 25 अगस्त तक प्रवेश करने वाले ने पहली बार, हर कार्य में सफलता

  • श्री सूर्य चालीसा

दोहा
कनक बन्दन केंदर, मुलाक़ात गुलाबी रंग का।
पद्मासन को पढ़ा गया, शंख चक्र के साथ।।

चौपाई

जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्तश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।

विवस्वान, आदित्य, विकृतन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अंबरमणि, खग, सुन कहलाते, वेद हिरन्यगर्भ कह गाते।

सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगिन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मॉनर, हांक हय साता रथ पर।

मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चात्रिवा सदृश हय जोते, देख पुरन्दर लज्जित।

मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, एकर, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
अदवाद नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नववै।

चार पदर्थ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्ते को चमत्कारी, विधि हरिहर कृपासार यह।

सेवैल भानु आप अष्टसिद्धि नवनिधि ते अँग्रेज़ी।
बारह नाम उच्चारण, सहस जन के पातक तरते।

उपाख्यान जो तवजन, रीपु सों जम्लहतेहतेहिछन।
छन सुत जुत परिवार वृद्धि, प्रबलमोह को फंद कटतु है।

शश कोश रक्षक परिजन, रवि ललाट नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिन कर छाज।

भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौन हित।
ओठ फ़रिश्ते संबंधी हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्रेमि।

कंठ सुवर्णावाभा की शोभा, तिग्मतेजः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठ व्रण, त्वष्टा-वरुण रेम सुष्ठकर।

कीट तालिका पर रक्षक कारन, भाउदनाल उरर्मं सुरचन।
बसत नाभि मनोहर, कटि मंह हंस, रेत मन मुदभर।

जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विस्वान पद की रखवाली, आउट बसते नत ताम हारी।

सहस्रंशु, सर्वांग सम्पादितै, रक्षा चमत्कारी विचार।
अस जोजन अपने न माही, डर जग बीज करहुं तेहि नाहीं।

दरिद्र कुष्ट तेहिं कबाहुं नव्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अमोज जग का हरता, नव प्रकाश से आनंद भरता।

गण ग्रसि न मित ग्रही जाही, कोटि बार मैं प्रणवं ताही।
मंद सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज अद्भुत बांके।

धन्य-धन्य तुम दिनमनी देवा, करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भाव पूर्ण नियम सों, दूर हुत सो भव के मनुष्य।

परम धन्य सो नर तनेश्वरी, प्रसन्नता जेही पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम सूर्य उदय।

भानु उदय खब वैवाह, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ सूर्य गा।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर जनतंत्र।

अगहन विष्णु पूसअंगु, पुरुष नाम हैं मलमासहिं् ।

दोहा

भानु चालीसा प्रेम्य, गावं. जे नर नित्य।
सुख संपत्ति संपत्ति भिन्न, थि सदा कृताकृत्य।।

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