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Pradosh Vrat Pujan Is Beneficial In Increasing Health And Prosperity 

प्रदोष व्रत : ों प्र लाभ यह एटीट्यूड के लिए बेहतर है। Movie सूर्यदेव के समय पूजा का महत्व है। इस संकट से मुक्त होने के संबंध में है।

शुक्ल आषाढ़ तिथि 21 जुलाई को दिनांक 4:06 बजे दिनांक 22 जुलाई सुबह 1:32 बजे, बार प्रदोष काल 21 जुलाई 07:18 बजे शाम 09:22 बजे। इसलिए प्रदोष व्रत 21 जुलाई. इस दिन व्रत रखने वाले लोगों को पूरे दिन निराहार रहना होता है। साथ में ही दिनभर मन में ‘ॐ नम: शिवाय’ का जाप लाभकारी है।

कम से कम 108 बार जरूर पाएं। बाद में सूर्यदेव के बाद भोज कर शिवजी का षोडशोपचारुपूजन. प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4.30 से शाम 7.00 बजे के बीच उत्तम है। पूरे पूरे दिन में एक बार फलाहार कर सकते हैं, अन्न, पूजा, मिठाइयां ऐसी है।

कलश, आरती थाल, धतूरा, भांग, कूपर, बेलपत्र, फूल-माला, जल श्वेत, चंदन, धूप, दीप, वस्त्र, वस्त्र, पशु, हवन पदार्थ।

पूप विधि: नित्यक्रिया से निवृत्त होने के बाद, और शिवजी की उपासना करें. पूरे देश भर में निराहार ‘ॐ नम: शिवाय’ व्रत का होना चाहिए। नैवेद्य में जौ का आप, और शकर का भोग भोग, तत्पश्चात आठों में आठ दीपक सभी को आठ बार प्रणाम करें। जल और दूर्वालाकर टच करें।

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