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Pradosh Vrat 2021: When is the first Pradosh Vrat of Sawan Know the auspicious time Pradosh Kaal and importance – Astrology in Hindi

शुक को शिव समर्पण का व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। सावन मंगल का प्रदोष प्रसन्नता मंगलमयी और शुभ फलदायक है। सावन मास और प्रदोष व्रत शिव को प्रिय है। ओं इसके-साथ में सुख-समृद्धि और तेज तेज।

साल साल का पहला प्रदोष व्रत 05 अगस्त, दिन अपडेट है। 05 अगस्त को दिनांक 05 अगस्त को शाम 05 बजकर 09 से प्रभामंडल, जो 06 अगस्त की शाम 06 बजकर 51 बजे तक।

प्रदोष काल का समय और महत्व-

05 अगस्त को शाम 06 बजकर 27 से 06 बजकर 51 तक का समय प्रदोष काल होगा। प्रदोष व्रत के दिनशुष्क की प्रदोष काल में शिष्टा शुभाष्टा होती है। क्रिया के अनुसार, प्रदोष काल में शिव की प्राप्ति के लिए कार्य करना होगा और मनोकामना करना होगा।

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प्रदोष काल क्या है?

प्रदोष व्रत के दिन शंकर की पूजा प्रदोष काल में करते थे। मौसम के अनुसार, सूर्य के समय से 45 पूर्व रक्षा चक्र प्रदोष काल तक 45 मिनट तक। ऐसा कहा जाता है कि प्रदोष काल में शिव की पूजा से शुभा की बैठक होती है।

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प्रदोष व्रत पूजा विधि-

प्रदोष व्रत के बाद पूजा के लिए सभा। शिव और माता पार्वती को चंदन, पुष्प, अक्षत, दक्षिणा और नैवेद्य. मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का असर. मां पार्वती को तापमान सुखद होता है। एच.जी. शिव माता पार्वती की आरती को थोड़ा हटकर। पूरे दिन व्रत-नियमों का पालन करें।

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