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प्रबंध काव्य किसे कहते है और इसके भेद कितने है?

Hindi Ka Pratham Prabandh Kavya Kise Mana Jata Hai

क्या आप जानते है कि हिंदी का प्रथम प्रबंध काव्य किसे माना जाता है, यदि नहीं तो कोई बात नहीं आज का यह पोस्ट आप सभी के लिए ही तैयार किया जा रहा है।  दरअसल, वर्तमान समय में अधिकांश व्यक्ति हिंदी का प्रथम प्रबंध काव्य किसे माना जाता है, यह सवाल गूगल पर सर्च कर रहे है। यदि आप भी इन में शामिल है, तो आपके लिए हमारा आज का यह पोस्ट काफी उपयोगी और महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

क्योंकि आज के लेख में मैं आप सभी को Hindi Ka Pratham Prabandh Kavya Kise Mana Jata Hai से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान किया जाएगा। इसलिए आप सभी से निवेदन है कि आप हमारे आज के इस उपयोगी पोस्ट के अंत तक बने रहें। तो चलिए सबसे पहले प्रथम काव्य के भेद के बारे में जान लेते हैं।

प्रबंध काव्य किसे कहते है और इसके भेद कितने है?

prabandh kaavy kise kahate hai aur isake bhed kitane hai?

क्या आप जानते है कि प्रबंध काव्य किसे कहते है, यदि नहीं तो आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जहां पर कथा या घटनाएं कहानी काव्य के तौर पर चलती रहती है, उसे हम सरल शब्दों में प्रबंध काव्य कहते है। जानकारी के मुताबिक, प्रबंध काव्य के दो भेद होते है। पहला महाकाव्य और दूसरा खंडकाव्य। प्रबंध काव्य रामचरितमानस से अवधि लैंग्वेज में लिखा गया है। इसके साथ ही आपको बता दूं की इसे तुलसीदास ने लिखा था।

प्रबंध काव्य के कितने भेद होते है?

क्या आप जानते है कि प्रबंध काव्य के कितने भेद होते है, यदि नहीं तो कोई बात नहीं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि प्रबंध काव्य के दो भेद होते है। जो कि इस प्रकार है:-

  • महाकाव्य
  • खंडकाव्य

महाकाव्य किसे कहते हैं?

यदि हम महाकाव्य के बारे में सरल शब्दों में समझे, तो यह वो काव्य सचनाएं होती है, जिसमें किसी महापुरुष के पूरी जीवन परिचय का कविता या गाथा के तौर पर प्राप्त हो जाती है। वही इसके उदाहरण के बारे में बात करें, तो रामचरित्रमानस से अच्छा उदाहरण शायद ही कोई होगा। दरअसल, इस तरह से महाकाव्य रामायण को संस्कृत भाषा में लिखा गया है। जी हां इस रामायण में श्री राम जी के जीवन के बारे में संपूर्ण जानकारी संस्कृत भाषा में दी गई है।

खंडकाव्य किसे कहते है?

यदि हम खंडकाव्य के बारे में सरल शब्दों में जानने की कोशिश करूं, तो यह हिंदी भाषा और संस्कृति भाषा में प्रबंध काव्य के तहत आता है। परंतु, जानकारी के मुताबिक इसमें नायक के संपूर्ण जीवन के बारे में न जानकारी प्रदान करके, किसी एक हिस्से का वर्णन या जीवन के अंश से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्रदान किया गया है। वही इसके उदाहरण के बारे में बात करें तो इसमें हल्दीघाटी, अग्रपुजा और सुदामा इत्यादि शामिल है।

हिंदी का प्रथम प्रबंध काव्य किसे मन जाता है?

यदि हम हिंदी का प्रथम प्रबंध काव्य किसे माना जाता है के बारे में बात करें, तो जानकारी के अनुसार चंदरबरदाई कृत पृथ्वीराज रासो को ही हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है।

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निष्कर्ष

आशा है या आर्टिकल आपको बहुत पसंद आया हुआ इस आर्टिकल में हमने बताया (-) के बारे मे संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगे तो आप अपने दोस्तों के साथ भी Share कर सकते हैं अगर आपको कोई भी Question हो तो आप हमें Comment कर सकते हैं हम आपका जवाब देने की कोशिश करेंगे।

FAQ

हिंदी का प्रथम प्रबंध काव्य क्या है?

हिंदी का पहला प्रबंध काव्य कौन सा है? पृथ्वीराज रासो हिंदी भाषा में लिखा गया पहला प्रामाणिक और विशाल महाकाव्य है जिसमें पृथ्वीराज चौहान के जीवन और चरित्र का वर्णन है।

प्रबंध काव्य कितने हैं?

प्रबंधन कविता दो प्रकार की होती है। इसे प्रबन्ध कहा जाता है, जहाँ घटनाएँ या कहानी काव्य के रूप में क्रम से चलती रहती हैं। जैसे रामचरितमानस प्रबंध काव्य है जिसमें राम जी के जीवन चरित्र की घटनापूर्ण कथा उस काव्य में प्रकट होती है।

हिंदी के प्रथम महाकाव्य कौन है?

सरहपा हिन्दी के प्रथम कवि हैं। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 3 सर्हपा है। हिन्दी के प्रथम कवि- सरहपा। राहुल सांकृत्यायन ने जैन साहित्य के रचयिता सिरहापा को हिन्दी का प्रथम कवि माना है, जिनकी जन्मतिथि 8वीं शताब्दी मानी जाती है।

सबसे बड़ा खंडकाव्य कौन सा है?

रश्मिरथी, जिसका अर्थ “सूर्य की सारथी” है, हिन्दी के महान कवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित प्रसिद्ध खण्डकाव्य है। यह १९५२ में प्रकाशित हुआ था। इसमें ७ सर्ग हैं।

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