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pitru paksha shradh 2021 start and end date tarpan puja vidhi importance significance and samagri ki list – Astrology in Hindi – Pitru Paksha Shradh 2021 : पितृ पक्ष कल से, नोट कर लें श्राद्ध

पितृ पक्ष श्राद्ध 2021: भाद्र मास की पौंड की जांच की जाती है। आश्विन मास के कृषक अमावस्या के साथ डेट्स डेट करने वाला है। हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। पितर को झुंड के नाम से भी जाना जाता है। पितृ में पितृों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इस प्रणाली में कानून- व्यवस्था से पितर काम करने से पितृों का संगठन प्राप्त होता है और पितरों को मोक्ष की इसी तरह। जुलाई 2021 से पीटर पत्रिका का अद्यतन किया गया है। डेट्स, महत्व और सामग्री की लिस्ट…

मृत्यु की तारीख की तारीखें श्राद्ध

  • पितृ तिथि की तारीख की तारीख तय की गई है। किसी तारीख की तारीख की तारीख की तारीख तय हो गई है। इस दिन सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है।

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पितृ तिथि तिथि तिथि-

  • पूर्णिमा श्राद्ध – 20 2021-
  • प्रतिपदा श्राद्ध – 21 2021
  • दूसरा श्राद्ध – 22 2021
  • मौसम श्राद्ध – 23 2021
  • चतुर्थी श्राद्ध – 24 2021,
  • पंचमी श्राद्ध – 25 2021
  • षष्ठी श्राद्ध – 27 2021
  • सप्तमी श्राद्ध – 28 2021
  • अष्टमी श्राद्ध- 29 2021
  • नवमी श्राद्ध – 30 2021
  • दशमी श्राद्ध – 1 2021
  • एकादशी श्राद्ध – 2 2021
  • द्वादशी श्राद्ध- 3 2021
  • योदशी श्राद्ध – 4 त्र ज्ञान 2021
  • चतुर्दशी श्राद्ध- 5 ज्ञान 2021
  • अमावस्या श्राद्ध- 6 2021

दिनांक 26 तारीख़ को तिथि तिथि है।

पितृ पक्ष का महत्व

  • परिवार में काम करने वालों को जीवन में खुशी मिलती है।
  • इस तरह के सूक्ष्मदर्शी प्रकाश प्रक्षिप्त होते हैं और इसे व्यवस्थित करते हैं।
  • पितर दोष से मुक्ति के लिए, यह श्राद्ध, तर्पण शुभ है।

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श्राद्ध विधि

  • एक सुकर्मा ब्राह्मण के जन्म के श्राद्ध (पिंड दान, तर्पण) कर्वान।
  • श्राद्ध कर्म में पूरी श्रद्धा से ब्राह्मणों को तो दान दिया ही जाता है साथ ही यदि किसी गरीब, जरूरतमंद की सहायता भी आप कर सकें तो बहुत पुण्य मिलता है।
  • पशु-पक्षियों के लिए यह भी एक समान है।
  • गंगा नदी के आवरण पर चढ़ने वाला कवच स्वच्छ होना चाहिए। यह भी हो सकता है। जिस दिन श्राद्ध हुआ उस दिन ब्राह्मणों को भोज करना चाहिए। भोजन के बाद दक्षिणा भी संतोष करें।
  • श्राद्ध पूजा रात का समय शुरू हो रहा है। वैध ब्राह्मण की से मंत्रोच्चारण और पूजा के जल से तर्पण करें। 🙏 14-दिन के समय अपने उपहारों को स्मृति में रखें। मन ही मन धुरंधर धुँधला करने के लिए.

श्राद्ध पूजा की सामग्री:

  • रोली, सिंदूर, सूक्ष्म सुपारी, रक्षा सूत्र, सरसों, जनेऊ, कपूर, लहसुन, देसी, माचिस, कैल, काला तिल, तुलसी, पान का, च, हवन सामग्री, गुड , मिट्टी का दीया , रुई बत्ती, अगरबत्ती , हलवा, चाव का निर्माण, गंगाजल, खजूर, केला, वाइट फूल, उड़द, गौ का दूध, दूध, खीर, स्वांक के चावल, रव, ।

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