Panchaang Puraan

Navratri – Astrology in Hindi

नवरात्रि का दूसरा दिन : चैत्र नवरात्र में पूरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की छुट्टी होती है। ब्रह्मशनी की उपासना से मनचाहे फल की चाल परिवर्तन और, वैराइटी, वैराग्य, सदाचार और वैराग्य जैसे गुण बढ़ते हैं। मां ब्रह्मचारिणी से आलस्य, अंहकार, लोभ, असत्य, स्व वलय दुष्प्रवृत्तियों से दूर स्थित हैं। तेज गति से स्थिरीकरण। साथ ही बुद्धि, विवेकाधिकार में वृद्धि होती है।

माँ का रूप तेज तेज और शानदार है। ष्टिकोण साधक का स्वाधिष्ठान चक्र में. मां ब्रह्मचारिणी ने शिव को पति में टाइप किया। इस माँ को ब्रह्मचारिणी और तपस्चारिणी कहा गया। माँ ब्रह्मचारिणी वस्त्रों का रंग बदलना। संचार तालिका में अष्टदल की मंडली और संचार डेटाबेस में संचारक मंडल है। मां ब्रह्मज्ञानी सभी विधाओं का सूत्र हैं। माँ आनंदमयी हैं। रात के खाने के लिए रात भर नाश्ता करना चाहिए। जलपान करना चाहिए। निर्णय लेने का प्राप्त प्राप्त करना है।

इस आयख में दी गेक जानकारिता धार्मिक आस्थॉन्ग और लॉकिक मान्यताकार पर आधेरत हैं, जिन्केश सच जन्नरुची को कायन में रखनाकर प्रोस्टुत्त किया है।

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