Panchaang Puraan

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शारदीय पर्व पर्व 7 तिथि, तिथि से पहले। 14 अक्टूबर तक की कहानी। 15 को दशहरे पर विजयदशमी की छुट्टी। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का अधिक महत्व है। नवरात्रि के लिए दुर्गा को प्रसन्नता के लिए भक्त 9 व्रत भी करेंगे। नवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाएं। माता-पिता के लिए माँ की आरती से मनवाँछित फल की कीट…

  • माँ दुर्गा आरती-

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्म शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जल से दोउ नाना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी

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कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै।
रक्तपुष्प गल मलिक, कण्ठन पर साजै
जय अम्बे गौरी
केहरी वाहन राजत, खड्ग खप्‍पूर्णाहारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी

कण्ण कुंडल शोभित, निंग्रेम।
कोटिक चंद्राकर, सम राजत ज्योति
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर धाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज बीज।
मधु- दोभौ, सुरभयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्राह्मणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी

मंगल ग्रह चौंसठ योग, डांस करत भैर.
बाज़ ताल मृदंगा, अरु बाज़त डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुखी खुशियाँ॥
जय अम्बे गौरी

बंचाचार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति
जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख पावै
जय अम्बे गौरी

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