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Mahima Shanidev Ki Shukracharya Forced Shani Dev To Take Divine Punishment

महिमा शनिदेव की: शनि और सभी सूर्यदेव (सूर्यदेव) के पुत्र हैं। यह पता चलने वाला शुक्राचार्य (शुक्राचार्य) को न्यायाधिकारी होने का शक हो गया। महादेव की स्थिति के अनुसार अनुकूलता की स्थिति थी। ऐसे में देवराज इंद्र (देवराज इंद्र) ने निर्णय लिया। पूरी पूरी ️ उनकी मां पर कोई भी संकट।

इंद्राचार्य ने शुक्राचार्य की योजना

सूर्य का परीक्षण किसी भी प्रकार से खराब हो जाएगा, ऐसे में सूर्यदेव के गुणों से युक्त देवों के फोन की बैटरी चुनौती खड़ी हो जाएगी। ऐसे में देवराज इंद्र को एक युक्ति सूजी। देवताओं के शैतान के लिए शस्त्रागार। ऐसे में इंद्र ने पाताल में पाए जाने पर परमशत्रु दैत्य गुरु शुक्राचार्य से मदद की। कोच्चा से एक कथनाव दैवीय को कहते हैं, जो शनिदेव की मां शुक्र को संकट में दे संपूर्ण ब्रम्हांड में खलबली दे। इस तरह के ️ मां️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ है है।

यज्ञ से चक्र चक्र
शुक्राचार्य ने यज्ञ कर महादानव किया, जो संपूर्ण को पूरा किया। देव विश्वकर्मा के पद पर नियुक्त, इंद्रीमंडल में आने वाली माँ विलेन होने वालीं। यह देखकर शनिदेव ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन प्रयास नाकाफी होने लगे और पूरा विश्वकर्मा महल चक्रवात का शिकार बनने लगा। ऐसे में इस डिवाइस में बदलाव आया था और यह आवश्यक है कि यह ठीक हो जाए। यह देखकर देवता और दानव हैरान रह गए।

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