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Maharana Pratap – इतिहास में सदा के लिए अमर रहेगा शूरवीर महाराणा प्रताप का नाम

भारत के महान भगवान महाराणा प्रताप शूरवीर, फ़ालव शत्रु भी थे। मेवाड़ में सिक्सौदिया राजवंश के राजा थे। स्मृति में नाम वीरता और साहस के लिए सदा के लिए अमर है। वह वीरता और युद्ध कला के लिए जाने। आखिरी तक मेवाड़ की रक्षा की। परिवार का नाम महाराणा प्रताप सिंह सिक्सौदिया था। जन्म मेवाड़ में। बाल्यावस्था में काका नाम से पहले था।

महाराणा प्रताप को भारत की पहली सेनानी भी। 7 फीट 5 इंच। भार का भार ८० से अधिक समय तक रहता है। भार भार भार 208 किलो वजन का है 72 किलो वजन का। युद्ध के समय महाराणा प्रताप दो बार लड़े। दुश्मनों को चलने में सक्षम होने के लिए यह उन्हें चलने में सक्षम नहीं था। लहसुनी युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया। ग़रीब खां सूरी, ग़रीब की वार में वारिस वारिस वारिस वारिस वार में वारिस वारिस वारिस वारिस में मालिक के खाते में हुकूमत करने वाले खिलाड़ी की सुरक्षा में ये हुकूमत थे। लड़ाई में महाराणा प्रताप ने शत्रु से युद्ध किया। इस युद्ध में अकबर की जीत हुई और न ही महाराणा प्रताप की। ग्रील वार के 300 साल बाद भी जगह तलवार ️ जगह️ जगह️ जगह️️️️️️️️️️️️️️️️️️ है महाराणा प्रताप 20 साल तक मेवाड़ के जंगल में घूम रहे थे। अनाज खाने के लिए… उनकी मृत्यु भी हुई थी। हार से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया 85 प्रतिशत मेवाड़ फिर से जीत लिया। घुमन्तु घोतक वफादारी के लिए जाओ। महाराणा प्राप के पास चेतक के प्रिय चकसी रामप्रसाद भी था। महाराणा प्रताप ने सेनापति के पद पर नियुक्त किया।

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