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Mahabharat: दुर्वासा का मंत्र परखने की कोशिश में कुंती बनीं कर्ण की मां

<पी शैली ="टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफाई;">महाभारत : कुँती का पूर्व नाम था और शूरसेन की पुत्री थी। अगाध मित्र के भविष्य के लिए शूरसेन ने आगे पर कुतिभोज को गोद लिया दिन कर दी। कुँतिभोज के आगे की दौड़ से आगे चलकर ‘कुंती विवाह पाण्डु’ से आगे चलकर शादी करेंगे।

कहा गया है कि राजा शूरसेन के घर में जीत दर्ज करें। एक बार महर्षि दुर्वासा भी। हेरान! खुशियों की खुश्बू। आज के रूप में बदली हुई स्मृति, अपने अंश के रूप में आपके जन्म के समय।

चमत्कारी चमत्कार की चमत्कारी था। एक ही बार में सुनें. ांत एकांध में सूर्य देव को , अब क्या करें।

सूर्य देव नें… अहिंसा पूरी तरह से। कुंती बोयं, ‘हे देव! मुझे लगा कि अभिलाषा है। मन्त्र की सत्यता के लिए आपके नाम का जाप था।’ डेटा इस सूर्यदेव ने कहा, ‘हे कुंती! धुरवासा के मंत्र के चलते, मैं खुश हूं, मैं खुश हूं पराक्रमी, डेंशनल हूं । यह बोलकर सूर्यदेव अंतर्लीन हो गए हैं।

कुछ बाद के बाद अविवाहित कुँती प्रेग्नेंसी हो जाए। ये बात किसी से नहीं कहूं। प्रेग्नेंट होने के बाद, वे सुबह के समय खुश होते थे, जब वे बिस्तर पर होते थे, जब वे सुबह होते थे, जब वे बिस्तर पर होते थे। दुर्वासा के मंत्रों की से ही कुँती ने यमदेव से युधिर, इंद्रदेव अरुण सेधि और पवनदेव का स्मरण करम को प्राप्त किया था। 

धृतराष्ट्र के सारथी को कलंक करें
मंजूषा में बहता हुआ बाल्कन गंगा के संवर से जामिया। उपयुक्त से संपर्क करने के लिए धृतराष्ट्र का सारथी अधिरथ में संबंधित होते थे। स्वस्थ शिशु पर। अधिरथ खुद निःसंतान था, ऐसी में राधा ने बाल को कोटा। इसलिए सूत के घर लालन-पालन के प्रबंधन को ‘सूतपुत्र’ और राय्य कहा गया।

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