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kartik maas 2021 dhan labh ke upay remedies totke how to get blessings of maa laxmi – Astrology in Hindi – धन

हिंदू धर्म में शुभ पर्व का महत्व अधिक है। कार्तिक मास में माँ लक्ष्मी की विशेष पूजा- क्र.सं. माँ लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की रक्षा है। व्यवस्था-व्यवस्था से लक्ष्मी की पूजा- माँ कृपा प्राप्त करने के लिए माँ का गंगाजल से प्रार्थना करें और माँ शुक्रवार की रात्री करें। माता लक्ष्मी के साथ विष्णु की पूजा भी करें। शुक्रवार की मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अष्टालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ चाहिए। इस पाठ को करने से घर में सुख- समृद्दि आती है और दुख-दर्द दूर होते हैं। आगे पढ़ें, श्री अष्टलक्ष्मी लक्ष्मीपति…

आने वाले समय में ये राशियों पर गुरु और बुध की कृपा, देखें क्या आप भी इस सूची में शामिल हैं

श्री अष्टलक्ष्मी लक्ष्मीराम:

  • लक्ष्मी

सुमनस वन्दित सुन्दरी माधवि चंद्र सहोदरी हेममये।

मुनिगण वन्दित मोक्षिणी मंजुली वेदनुते।

पकजवासिनी देवसुपूजित सद-गुण वर्ष शांतनुते।

जय जय हे मधुसूदन कामिनी आदिलक्ष्मि परपालय मम् ।

  • धन्य लक्ष्मी:

अयिकली कल्मष नाशिनि का मिनी रूपी वेदमये।
क्षर समुद्भव मङग्लपुरी मन्त्रनिवासी मन्त्रनुते।

मगलदायिनि अम्बुजवासीनि देवगणश्रित पादयुते ।

जय जय हे मधुसूदनकामिनी धान्यलक्ष्मि परिपाल माम् ।

  • सहनशक्ति लक्ष्मी:

जयवरवर्षि वैष्णवि भार्गवि मन्त्र स्वरुपिणी मन्त्रमये।

सुरगणित शीघ्र फल फल ज्ञान विकास विकास ।

भभयहारिणी पापविमोचनि जनाश्रित पाद्युते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनि सहनशीलता लक्ष्मि सदापाल्य मम् ।

  • गज लक्ष्मी:

जय जय दुर्गति नशिनि कामिनी स्वरूपी वेदमये।

रधज तुर्गपदाति समवृत परिजन मंदार लोकनुते ।

हरिहरब्रम्ह हरिजित सेवित निवारिणी पाद्युते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनी गजलक्ष्मि रूपेण पाले माम्।

  • सन्तान लक्ष्मी:

अयि खगवाहिनी मोहिनि चक्रीणी रागविवर्धिनि ज्ञानमय।

गुणगणवारिधि लोकहितैषीणि सप्तस्वर भूविष्ट गणनुते ।

सकल सुरासुर देव मुनीश्वर मानव वन्दित पादयुते ।

जय हे मधुसूदन कामिनि सन्तानलक्ष्मि परपालय मम् ।

  • विजय लक्ष्मी:

जय कमलासनि सदा-गति दायिन ज्ञानविकासिनि गानमये।

अनुदिन मरचित कुष्कुम धसर भू परोक्ष वादोनुते ।

कनकधस्ति वैभवन् वंडित शङ्क्ष् वरातुपदे ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनी विजयक्ष्मि परिपाल मम् ।

  • विद्या लक्ष्मी:

प्रणत सुरेश्वरी भारती भार्गवि शोविनाशिनि रत्नमये।

मणिमय चयनित कर्णविविधान शांति भूस्वामी भूमुखे ।

नवनिधिदायनी कलिमलहारिणी कामित फल प्रकृत हस्त्युते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनी विद्यालक्ष्मि सदा पाले माम् ।

  • धन लक्ष्मी:

धिमिधिमि धिधिमि धिधिमि-दिधिमी दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये।

घुमघुम घु्घुम घु्घुम घुंघुम शङ्ख इन्लाइनाद सुवाद्यनुते ।
वेद पुराण मार्गेतिहास सुपूजित मार्ग प्रदर्श्युते।

जय जय हे कामिनिधनलक्ष्मी रूपेण पाले माम् ।

अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपी।

विष्णुवक्षःस्थल रूढे भक्तमोक्ष ।।

शंख चक्र गदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः ।

जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलम शुभ मंगलम।

। श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र इष्टम पूर्ण।

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