Lifestyle

Janmastami 2021 : इस जन्माष्टमी कान्हा की इन दो रूपों वाली मूर्ति या चित्र से पूजा रहेगी बेहद शुभ 

<पी शैली ="टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफाई;"><>जन्माष्टमी 2021 : मज पर विस्तार हो या धर्म का है, असुरों का अकर्मण्य वृद्धि या मौलिक अनाचार, समय-समय पर अवतरण सत्य और धर्म की स्थापना। भाद्रपद कृष्ण के अष्टमी की रात खराब होने वालों के लिए मथुरा में श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। कृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत-पूजन का तरीका अपना होना चाहिए।

व्रत पूजा का तरीका
-उपवास से पहले ब्रह्मचर्य का पालन करने का तरीका होता है।
-स्नान के सूर्य, सोम, यम, काल, संस्कार , भूत, पवन, दक्षपति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्म को नमस्कार पूर्व या उत्तर दें। सिद्धये
-श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

-मध्याह्न के काला तिल जल से स्नान कर देवकीजी के लिए ‘सूतिका गृह’। मूर्ति चित्र में स्तनपान कराने वाली मां देवकी जैसे या लक्ष्मीजी कृष्णजी के चरण स्पर्श हो।
– बाद विधि-विधान से पूजा शुरू करें। देवकी, वासु, बल, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नामदेव देवता। फिर से इस मंत्र से पुष्पांजलि. अंत में रतज के भजन-कीर्तन और प्रसाद बांटने के साथ कृष‍ण जन्म के साथ उत्सव बनाना।

‘प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
वसुदेवात और कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः।

इन"सावन का महीना: शिवलिंगकर भी टच करें," href="https://www.abplive.com/lifestyle/religion/unmarried-girls-and-women- should-not-touch-shivling-any-time-know-the-reasons-1951867" लक्ष्य ="">सावन महीना:"टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफाई;">
नाग पंचमी: इस बार नाग पंचमी पर 108 दुर्लभ दुर्लभ संयोग

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button