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janmashtami 2021 date time shree krishna chalisa lyrics in hindi – Astrology in Hindi

जन्माष्टमी 2021 : श्री कृष्ण का जन्मगृह हर साल भाद्रपद मास में शुक्ल की खेती अष्टमी और रोहिणी में अच्छी होती है। इस साल 30 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मंगलमय हो गया। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पाठ भी। श्री कृष्ण विष्णु के पाठ से श्री कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • श्री कृष्ण चालीसा-

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।

अरुणअधरजनु बिम्बफल, नयनकमलअभिराम॥

पूर्ण इंद्र, अरविन्द मुख, पीतंबर शुभ साज।

जय मदन इमेज, कृष्णचन्द्र महाराज॥

जय यदुनंदन जयजंदन।

जय वसुदेव देवकी नंदन

जय यसुदा सुत नन्द दुलारे।

जय प्रभु भक्तन के दृश्‍य तार॥

जय नत-नगर, नाग नथिया॥

कृष्ण कन्हैया धेनु चरइया॥

पुनी नख पर प्रभु गिरीवर धारो।

दीन अडच निवारो॥

वंशी मधुर अधर धरि तेरौ।

होवे पूर्ण विनय यह मारू॥

हरि पुनी माखन चाखो।

आज लाज भारत की राहो॥

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।

मृदुम मोहिनी डारे

राजित राजिव नयन विशाला।

मोर कुक्ट वैजंतीमाला॥

केंडल श्रवण, पीत पट आछे।

कटि किंकिणी काछी काछि॥

नील जलज सुन्दर तनु सोहे।

छबी लखी, सुरनर मुनिमन मोहे॥

मस्तक तिलक, अलक ग्लोइंग।

कृष्ण बानुरी

करि पय पान, पूतनहि तार्यो।

उर्फ बका कागासुर मारयो॥

मधुवन जलत अफ़िन जब ज्वाला।

भै शीतल लखत लखित नंदला

सुरपति जब ब्राज यो रिसाई।

मुसर धारी वारि वर्ष

व्यवस्था में निवेश करें।

गोवर्धन नख धारी बचायो॥

लखी यसुदा मन व्यक्ति बाहरी।

मुख चौहद्दी भुवन दृश्य॥

अत्यधिक अति उधम मचायो॥

कोटि कमल फूल

नाथी कालिय.

चरण दैहिक निभय कीं

करि गोपीन संग रास विलासा।

सबकी पूरण करी अभिलाषा॥

केतिक महा असुर संहार्यो।

कैसहि के पास दै मंगलयो॥

मत-पिता की धारणाएँ।

देशसेन कहं राज॥

महि से मरी सिक्स सुत लायो।

मातु देवकी शोम मैयो॥

भौमासुर मुदैत्य संहारी।

लाये षट दश सहसकुमारी॥

दैई भीमहिं तृण चीर सह।

जरासिंधु ने कहा॥

असुर बकासुर आदिक मंगलयो।

भक्तिन के अडच निवार यो॥

दीन सुदामा के दुखदायी स्थिति।

तंदुल तीन मुंठ मुख्‍यमंत्री डॉ.

प्रेम के साग विदुर घरेलु।

दुर्योधन के मेवा सम्मिलित॥

लखी प्रेम की महिमा ग्रेट।

ऐसे श्याम दीन हितकारी॥

भारत के पारथ रथ हांके।

चक्र चक्र कर नहिं बल थाके लिये

निज गीता के ज्ञान सुनाए।

भक्त हृदय सुधा बर्षा

मीरा दौलतावली।

कार्य करने के लिए ताली बजाना

राणा सुपपना पिटारी।

शीलावाहन बनी भवनी॥

निज माया।

उर ते संशय माइटयो॥

शत निन्दा करि तब।

जीवन शिशु शिशुपाला

जब द्रौपदी खराब हो गई।

दीनानाथ लाज अब जाई

तुरथी वसन बनी नंदला।

च छेर भै अरि मो काला॥

अस अनाथ के नाथ कन्हैया।

दयत भक्षक रक्षा

‘सुंदरदास’ आसा उर धारी।

दया दृष्टि की जैव भवन

नाथ सकल मम कुमति निवारो।

क्षमहु बेगी अपराध हमरो॥

खोलो पट अब दर्शन दीजै।

बोलो कृष्ण कन्हैया की जय॥

दोहा

यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारी।

अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथचारिणी॥

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