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Janmasatmi : जानिए वे दशाएं जिनके चलते तय होता है जन्माष्टमी व्रत

<पी शैली="टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफाई;">जन्माष्टमी : पंचांग और आधार पर की गणना के अनुसार अष्टमी पहली रात में ही शुरू होगी। जब तक यह 24 घंटे तक खराब रहती है, तब तक यह व्रत व्रत के दौरान होती है।

– अष्टमी के दिन रात में अस्त होने के बाद भी ऐसा ही होता है और रात में अस्त होने के बाद भी ऐसा ही होता है जब जन्माष्टमी व्रत रोहिणी रात में ऐसा होता है।

– अष्टमी के दिन रात के समय रात के समय अस्त-व्यस्त होने के साथ-साथ अस्त्रात्री में रोहिणी नक्षत्र तो जन्माष्टमी का दिन होगा।

– अष्टमी अध्यात्म में अष्टमी का दिन रात में अस्त होता है और अष्टमी अध्यात्म में अष्टमी का प्रसारण होता है।

–  अष्टमी के दूसरे दिन अष्टमी के दिन अस्तित्‍व में, अस्तित्मी तिथि व्रत के बाद भी।

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