Panchaang Puraan

how to get rid from problems astrology upay totke astro remedies in hindi hanuman chalisa ke fayde – Astrology in Hindi – परेशानियों से भर गया है जीवन? रोजाना इस उपाय को करने से मिलेगा दुख

भविष्य में गलत होने पर गलत होने पर गलत होगा। व्यक्ति का जीवन- दुख-दर्द-होने वाला है। सभी प्रकार की समस्याओं को ठीक करने के लिए, हनुमान जी कलयुग में भगवान हैं। माता सीता ने हनुमान जी को अजर-अमर की वरदानी दी है। जीवन में सुखी होने की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति के जीवन सुखमय हो जाते हैं. हर हल का हल: जी की कृपा से। हनुमान् जी की प्राप्ति के लिए श्री हनुमानजी का पाठ और भगवान श्री राम और माता सीता के नाम का सुमिरन होना चाहिए। आगे आगे श्री हनुमान चालीसा-

हनुमान चालीसा- (हनुमान चालीसा)

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनुज मुकुरु सुधारना।

बरनौ रघुबी जसु, जोबड़मलुलु फलचारि।।

बुद्धिमान तनु जानिके, सुमीरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गण सागर।

जय कपिस तिहुं लोक संघ।।

रामदूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नाम।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कान केंद केकुंड केसा।।

बजर औ ध्वजा बिराजै।

कांधे मुंज जनेऊ साजै।

स्नीकर सुवनमंदन।

तेज प्रताप महाजज बंधन।।

विद्या गुनी अति चतुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु की विशेषता सुनिबे कोसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म धरि सिय अध्यात्म।

बिट रूप धारी लंक जलवा।।

भीम रूप धारी असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे।।

जीवन जीवन लखन जियाये।

श्रीरघुबीर हरि उर लाये।।

रघुपति कीह्न बड़ाई.

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हारो गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ वातावरण में।।

सनकादिक ब्रह्मदि मुनिसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिग्पाल जहां रहते हैं।

कबी कोबिद कहलाते हैं..

आप उपकार सुगौरवहिं.

राममिलियन राज पद दीन्हा।।

हरो मंत्र बिभीषन।

लंकेस्वर भे सब जग जाओ।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मुख्‍य महिने।

जलधि लांघी अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज के जेते।

सुगम

राम दारे तुम रखवाले।

नत आज्ञा बिनु पैसा रे हो।।

सुखी रहती है सबना।

तुम काहु को भय ना।।

आपन सुधारो आपै।

सो लोक हांक तें कांपै।।

पी भूतसाच निकटवर्ती नहिं वैकल्पिक।

महावीर सुनाना…

नासिक रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतरता हनुमत बीरा।।

आपदा

मन क्रमबद्ध ध्यान ध्यान दें जो…

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज कुल साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोइ अमित जीवन फल पावै…

चारों जुग परताप।

यह सिद्ध है उजियारा।।

सुयोग-संत के तुम रखें।

असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि धन के धनी.

अस बर दिन जानकी माता..

राम रसायन तुम्‍हारे पासा।

सदा रघुपति के दासा।।

तुम्हीं भजन रामजी को पावै।

जनम-जनम के दुःख बेस्रावै ।।

अंतकाल रघुबर पुर जाई।

जहां जन्मा हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरी।

हनमत सेइ सरब सुख करई।।

आपदा कट मित्त सबेरा।

जो सुमिरन हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई.

लहि बंदी महा सुख होई।।

जो यह हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

की जै नाथ हृदयेश मंहश्वर..

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसु सुर भूप।।

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