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कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से हट गए और रेस में रेस की बबावत पर अटक गए से अशोक गहलोत पिछले एक महीने से शांत नजर आ रहे थे। लेकिन यह शायद तूफान से पहले की शांति थी, जो गुरुवार को राजस्थान में उभरती दिख रही है। अशोक गहलोत ने एक इंटरव्यू में सचिन पायलट को कई बार गद्दार की संज्ञा दी और कहा कि उनके पास 102 विधायक हैं, जबकि पायलट के पास 10 भी नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि सचिन पायलट कभी भी नहीं बन सकते। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शांत हो अशोक गहलोत अचानक क्यों भड़क उठते हैं।

पायलट को गहलोत ने बताया गद्दार,बोले- कभी नहीं बन रहा पेज

वास्तव में यह कुछ घटनाओं के माध्यम से समझा जा सकता है। सचिन पायलट और अशोक गहलोत के करीबी प्रमोद कृष्णम ने दो दिन पहले ही कहा था कि राजस्थान में जल्दी ही बदलाव होगा। इसके अलावा अजय माकन ने राजस्थान के प्रभार का पोस्ट रिटर्न की बात कही। उनका इशारा सीधे तौर पर अशोक गहलोत की ओर से था, जिनके गुट के विधायक नहीं आए थे। कांग्रेस सूत्र का कहना है कि राजस्थान में गुजरात चुनाव के बाद बदलाव हो सकते हैं। शायद यही वजह है कि अशोक गहलोत यह मौका ‘करो या मरो’ जैसा लग रहा है।

तो सचिन पायलट बन सकते थे राजस्थान के सीएम; गहलोत ने मन की टीस दी सीख

कैप्टन अमरिंदर का हाल क्यों अशोक गहलोत की बढ़ी चिंता

उनकी चिंता पंजाब में चुनाव से पहले बेदखल किए गए कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसा हाल होने की भी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी एक अतिरिक्त विस्तार के बाद अंत में हाईकमान ने मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था और वे कहीं नहीं थे। ऐसे में अशोक गहलोत को लगता है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष का पद पहले ही ठुकरा चुके हैं। अब आपका सचिन पायलट बनेगा तो फिर राजस्थान की हकीकत में भी उनकी कोई हैसियत नहीं रह जाएगी। यही वजह है कि अशोक गहलोत के तेज तीखे हो गए हैं और वह सचिन पायलट को गद्दार बताते हुए अपने साथ 102 लाख होने का भी दावा करने लगे हैं।

अशोक गहलोत के लिए ‘करो या मरो’ वाला मौका, मुश्किल है रार थमना

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष के पद को ही अस्वीकार कर दिया है तो फिर वह किसी भी तरह से किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाते हैं। वहीं सचिन पायलट को भी खुद को स्थापित करने का मौका दिख रहा है। गहलोत के हमलों को लेकर एक और बात कह रही है कि राजस्थान में राहुल गांधी की यात्रा झालावाड़, दौसा जैसी सीमा से टकराती है, जो गुर्जर बहुल हैं। यहां सचिन पायलट का क्रेज काफी है। अशोक गहलोत की चिंता की यह भी एक कारण है। इसलिए उन्होंने ऐसे वक्त में मोर्चा खोल दिया ताकि पायलट को चढ़ाई न मिल सके।

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