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guruwar ke totke thursday remedies totke tips how to get blessings of bhagwan vishnu – Astrology in Hindi – वृष, कर्क, सिंह, तुला राशि वाले गुरुवार को जरूर करें ये उपाय, दुख

???????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????? विष्णु की कृपा से व्यक्ति के सभी मनोविकार प्रभावित होते हैं। ज्योतिष में 12 राशियों का विवरण और इन 12 राशियों में से कुछ राशियों पर विष्णु के विशेष भाई-बहन हैं। ज्योतिष के अनुसार वृष, कर्क, सिंह और आप सभी लोग विष्णु के विशेष व्यक्ति हैं। इन राशियों के लोगों के लिए सूर्य विष्णु की विशेष पूजा- कृप्या. भगवान विष्णु की पूजा विधि-…

पूजा-विधि-

  • जल्दी जल्दी उठो।
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
  • विष्णु को पुष्पित और समूहित करें।
  • ️ अगर️️️️️️️️️️️️️️️
  • गोकू की आरती करें।
  • भोग को भोग भोजन। इस बात का विशेष रूप से सम्‍बन्‍ध में अच्‍छी बात है। विष्णु के भोग में शामिल हों। पर्यावरण के अनुकूल होने के बाद, विष्णु वातावरण में भोजन करते हैं।
  • पावन भगवान विष्णु के साथ इस माता लक्ष्मी की पूजा भी करें।
  • इस व्यक्ति का अधिक से अधिक ध्यान दें।

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श्री विष्णु चालीसा का पाठ-

  • श्री विष्णु चालीसा, श्री विष्णु चालीसा

दोहा

विष्णु सत्य रक्षा सेवक।
कीरत कुछ वर्णन

चौपाई

नमो विष्णु खरारी।
नशावन अखिल बिहारी

राज्य में मजबूती।
त्रिभुवन कीट उजियारी॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत।
सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥

तन पर पीतांबर अति सोहत।
बेंती मलिक मन मोहत

शंख चक्र कर गड़ा बिराजे।
देखना दैत्य असुर दल भाजे

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।
काम मद लोभ न छाजे

संत भक्ति मनरंजन।
दनुज असुरन दल गंजन॥

सुखी फलादेश सब भंजन।
दोषाय करत जन

पाप काट भव थल।
अडचन नारा भक्त उबारण॥

करत अनेक प्रकार के कॉर्टिंग।
आप विभाग के

धरणिधे नु बन.
तब तुम रूप राम की धारा॥

भार असुर डटैक्ट।
रंक आदिक को संहारा॥

आप वराह रूपी।
हरण्याक्ष को मारिड़या॥

धर मास तान सिंदूर।
चौराहा रतन को कुश्या॥

अमिलख असुरन द्वंदया।
रूप मोहनी आप॥

देवन को अमृत सुरक्षा।
असुरन को इमेज से बहलाया॥

कूर्म रूप धर सिंधु मझिया।
मंदद्राचल गिरी तुरत

शंकर का आप पसंद करते हैं।
भस्मासुर को रूप॥

वेदन को जब असुरदया।
कर प्रबंधित करें

मोहित खलहि नचाया।
यह वही है जो पहले पता

असुर जलंधर अति बलदाई।
शंकर से शाम लडाई॥

हरि शिव महासम्मेलन।
कीन सती से छल खल जाई॥

सुमिरन की पाप शिवरानी।
बतलाई सब विपत कहानी॥

तो तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।
वृंदा की सब सुरतिनी॥

देख तीन दनुज पैतानी।
वृंदा आय पैप लपटानी॥

हो टच धर्म
हना असुर उर शिव पैतानी॥

ध्रुव ध्रुव प्रहलाद उबरे।
हिराणा कुस आदिक ख़ल

गणिका और अजामिल तारे।
मंदभक्त भव सिंधी उतार

हू हर सकल संत हमारे।
कृपा करहु हरि श्रृजन हरि

देख रहा हूँ मैं निज दरश तुम्हारी।
दीन बंदु भक्तन हितकारे॥

च दैह्य वैज्ञानिक दर्शन।
करहु दया मधुसूदन॥

जन मान्य जनप्रिय।
होय यज्ञ स्तुति पुष्टि

शीलदया सन्तोष समाधान।
विदित विश्वास मत

करहुं किस विधिपूजक।
कुमति विलोक होत दुष्प्रशंसा

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरन।
कौन है मैं करुएशन॥

सुर मुनि करत सदा सेवकाई।
हर्षित परम गति पी

दीन दुख पर सदा सहाय।
निज जन जान अपने आप में

पाप दोष नशामुक्ति।
भव-बंधन से मुक्त कराओ॥

सुख-समृद्धि सुख-सुविधाओं की खेती।
निज चराना का दास बनाना॥

हमेशा के लिए विनय सुन।
उपै सुनै सो जन सुख पावै॥

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