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गुजरात चुनाव में बीजेपी को भले ही मजबूत माना जा रहा हो, लेकिन वह पर्यवेक्षकों से ज्यादा अंदरुनी तौर पर परेशान है। बीजेपी ने बड़े पैमाने पर स्टेक के टिकट काटे हैं और इसके चलते कुछ नेता बागी हो गए हैं। मधुर श्रीवास्तव जैसी ताकतवर विधायक पार्टी में बदल गए हैं तो कई ऐसे भी नेता हैं, जो भाजपा में रहते हुए भी नए रूप में दिख रहे हैं। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को निश्चित रूप से एक उम्मीद नजर आ रही है। आम तौर पर कांग्रेस इस तरह की बगावत का सामना करती है, लेकिन गुजरात भाजपा में ऐसा पहली बार हो रहा है। यह साफ है कि बीजेपी अंदरखाने ऑल एज वेल नहीं है, जैसा कि पार्टी दिखा रही है।

मोदी-शाह: बीजेपी में क्यों सुनाते हैं दो ही नाम? समझ का काम

बीजेपी ने 27 साल के लिए एंटी इनकमबैंसी से डील के लिए ये गठबंधन किए हैं। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि बीजेपी अक्सर दूसरे पक्षों की आपस में दोस्ती तोड़ रही है और फिर टिकट दे रही है। यह रणनीति अब उसके लिए भारी पड़ रही है। पार्टी के अंदर से इसके खिलाफ आवाज उठ रही है। गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि टिकट न लेने वाले भाजपा नेता खुलेआम विरोध में उतरे हैं। ऐसे भाजपा में दुर्लभ था, लेकिन यह आशा से परे नहीं है। एक तरफ स्थानीय स्तर पर पार्टी को रिश्वत से लेकर अन्य तमाम मुद्दों पर विरोध अभियान चल रहा है। वहीं हाईकमान की कोशिश है कि दूसरे पक्षकारों पर कांग्रेस से आने वाले नेताओं को टिकट दिया जाए।

बाहरी लीडर्स पर स्टेक्स क्यों हाईकमान लगता है

पार्टी नेतृत्व को लगता है कि दूसरे दलों के आने वाले नेताओं के साथ एक जनाधार भी आता है, जिसका भाजपा समर्थन आधार के साथ मिल जाने पर पक्की हो जाता है। हालांकि अब यह स्टेक्स भी गलत साबित हो रहा है क्योंकि नेता और कार्यकर्ता टिकट बाहरी के फैसले को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। कई मामलों में तो अमित सीधे शाह को ही बागियों को राजी करने की कोशिश करनी पड़ती है। इससे पहले हिमाचल में भी कृपाल सिंह परमार जैसे बागी नेता को पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन किया था, लेकिन इसके बाद भी वह चुनावी समर से नहीं हटे।

मोदी फैक्टर और गुजराती अस्मिता का है सहारा

जुतेब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने ज्यादातर शादों का ऐलान कर दिया है। पार्टी को लगता है कि पीएम नरेंद्र मोदी फैक्टर और गुजरात अस्मिता के नाम पर जीत हासिल कर लेंगे। आम आदमी पार्टी की एंट्री से भी वोट बंटने की उम्मीद है। बीजेपी के लिए यह भी एक फायदे की बात लग रही है। हालांकि इस बीच बागवानों ने निश्चित रूप से अपना तनाव बढ़ा लिया है। जॉइनर पर करीबी अंतरजाल पर बागियों का रुख परिणाम बदल सकता है।

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