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घूमुरा नृत्य किस राज्य का लोक नृत्य है?

ghumura nritya kis rajya ka lok nritya hai

दोस्तों, आपने घूमुरा नृत्य के बारे में काफी बार सुना होगा। जब भी कालाहांडी के लोक नृत्य के बारे में बात आती है तब घूमुरा के नृत्य के बारे में लोग बात करना पसंद करते हैं। हालांकि यह एक आदिवासी नृत्य के तौर पर लोगों के द्वारा स्वीकार किया गया है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि घूमुरा नृत्य किस राज्य का लोक नृत्य है? यदि आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं क्योंकि आज के लेख में हम आपको बताएंगे कि Ghumura Nritya Kis Rajya Ka Lok Nritya Hai, इसका इतिहास क्या है, इसकी उत्पत्ति कहां हुई है, और इसके संबंधित पौराणिक कथा कौन सी है।

तो चलिए शुरू करते हैं:-

घूमुरा नृत्य क्या है? | Ghumura Nritya kya hai

घूमुरा नृत्य एक ऐसा नृत्य हैं जो कालाहांडी जिले का एक लोक नृत्य भी कहा जा सकता है। यह नृत्य करते समय एक विशेष प्रकार की वेशभूषा पहनना अनिवार्य है, जो कि आदिवासी वेशभूषा के समकालीन प्रतीत होती है।

लेकिन यह नृत्य घूमुरा वाद्य यंत्र के ऊपर किया जाता है। यह नृत्य शास्त्रीय नृत्य के रूप में अधिक समानता रखता है। यह नृत्य करने से पहले शरीर को अलग अलग रंगों से रंग जाता है और आकर्षक तरीके से नृत्य किया जाता है।

घूमुरा नृत्य की शुरुआत कब हुई? | ghumura nritya ke shuruaat kaise hui

ghumura nritya ke shuruaat kaise hui

कई लोगों का मानना है कि घूमुरा नृत्य 8000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। कुछ लोगों का यह मानना है कि घूमुरा नृत्य 10 वीं शताब्दी के पास से होना शुरू हुआ था, और कई लोगों का यह भी मानना है कि 1008 में घूमुरा की शुरुआत हुई थी जो कि जूनागढ़ से हुई थी।

घूमुरा नृत्य की शुरूआत के बारे में कुछ खास कहा नहीं जा सकता, लेकिन घूमुरा शब्दावली के बारे में चंडी पुराण में वर्णन होता है कि यह एक वाद्य यन्त्र है जिसका निर्माण भगवान शिव के डमरू तथा माता सरस्वती के वीणा से हुआ था।

घूमुरा नृत्य किस राज्य का लोक नृत्य है? | Ghumura Nritya Kis Rajya Ka Lok Nritya Hai

घूमुरा नृत्य ओडिशा राज्य का लोक नृत्य है। ओडिशा राज्य में भी जो कालाहांडी क्षेत्र है, उसके पास के क्षेत्रों में यह नित्य सर्वाधिक किया जाता है। मूल रूप से घूमुरा एक वाद्य यंत्र है जिसके ध्वनि पर नृत्य किया जाता है। यह नृत्य एक वैदिक नृत्य के तौर पर किया जाता है, लेकिन यह नृत्य करते समय जो वेशभूषा पहनी जाती है वेशभूषा आदिवासी वेशभूषा के समकालीन प्रतीत होती है।

घूमुरा नृत्य का इतिहास | ghumura nritya ka itihas 

घूमुरा नृत्य के इतिहास के संबंध में कुछ पुरातात्विक तथ्य और साक्षी यह साबित करते हैं, कि कालाहांडी के गुडाहांडी में कुछ ऐसे चित्र पाए गए हैं जो घूमुरा डमरु और ऐसे ही अन्य चीजों की तरह दिखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह चित्र चट्टानों पर बने हुए हैं और तकरीबन 8000 वर्ष पुराने हैं।

घूमुरा वाद्य यंत्र और डमरु की प्राचीनता की परिकल्पना इसी से की जा सकती है। ऐसा कहा जाता है कि घूमुरा नृत्य कोई आज का नया नृत्य नहीं है। बल्कि यह प्राचीन काल से चली आ रही रीति का एक पहलू है।

इंद्रावती नदी की घाटी के नीचे एक सुंदर जलप्रपात नजर आता है, जो चक्रकोट के तिलक नागो (नगा साधुओं) द्वारा किया जाता है। कई लोगों का यह भी मानना है कि घूमुरा इस नदी की घाटी से उत्पन्न हुआ है, और इंद्रावती नदी तथा महानदी के बीच में जो चित्र आते हैं उन सभी के माध्यम से यह पूरे ओडिशा क्षेत्र में फैलता चला गया।

कुछ लोगों का मानना है कि यह 10 वीं सदी के पास शुरू हुआ था और दूसरी और विश्लेषकों का मानना है कि सन 1008 में जूनागढ़ में शुरू हुआ था। जब घूमुरा अपनी पुरानी राजधानी जुगासेपटना से स्थानांतरित करके जूनागढ़ में स्थानांतरित किया था।

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घूमुरा नृत्य से संबंधित कुछ पौराणिक कथाएं | ghumura nritya se sambandhit kuch pauranik katha

हिंदू धर्म से जुड़ी हुई एक पौराणिक कथा घूमुरा दृष्टि से जुड़ी हुई है। इस घूमुरा नृत्य के संबंध में यही कहा जाता है कि जब राक्षसों के राजा महिषासुर का वध करना था तो उस समय शक्ति के शाश्वत देता ने स्वर्ग के सभी देवी देवताओं से राक्षस के राजा महिषासुर का वध करने के लिए एक हथियार देने को कहा था।

उन सभी ने अपना अपना एक-एक हथियार दिया था। उनमें से एक हथियार डमरु के एक टुकड़े के तौर पर तथा एक हथियार मां सरस्वती के वीणा के तौर पर उसे शक्ति के देवता को मिला था, और उस समय उन दोनों के सहयोग से घूमुरा वाद्य यंत्र का निर्माण किया गया। यह एक शस्त्र भी था जिसका इस्तेमाल वाद्य यंत्र के तौर पर किया जाता था।

अंतिम विचार

दोस्तों, आज के लेख में हमने आपको बताया कि Ghumura Nritya Kis Rajya Ka Lok Nritya Hai. इसके अलावा हमने घूमुरा के बारे में आपको और भी कई प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराई है, जो आपके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

हम आशा करते हैं कि आज का हमारा यह लेख आपके लिए काफी ज्ञानवर्धक रहा होगा। जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। यदि आपके मन में इस लेख से संबंधित कोई सवाल है जो आप हमसे पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

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