Panchaang Puraan

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गायत्री जयंती 2021: 21 जून को गायत्री है। हर साल तारीख़ के तारीख की तारीख को माँ गायत्री का जन्म तिथि है। विधायिका से मांत्री की पूजा- कृंतक। माँ गायत्री वेदों की जननी हैं। माँ की कृपा से सभी मनोभावों में रह रहे हैं। इस पावन दिन माता गायत्री का पाठ करें।

इन राशियों से संचार तक, हम भी धोखा दे सकते हैं

  • माँ गायत्री चालीसा

ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचंड

शांति कांति सृष्टि शक्ति अखंड ॥1॥

जगत जननी मंगल करनी गायत्री सुखधाम ।

प्रणवों सावित्री स्वधा स्वाध्याय कार्य 2॥

भूर्भुवः स्वः यत जननी ।

गायत्री नित कलिमल चूल्हा

अक्षर चौबीस परम पुनीता ।

जीन्स बसें शास्त्र श्रुति गीता ॥॥

मौसम सतोगुणी सत रूपा ।

सत्य सनातन सुधा अनूपा

हंसारूढ श्वेतांबर धारी ।

गोल्डन कांति शुचि गगन-बिहारी

बुक पुष्पकमंडलु मलिका।

शुभ वर्ण तनु नयन विशाला

ध्यान धरत पुलकित हित होई ।

सुखी फसल दुख दुर्मति खोई

कामधेनु तुम सुर तारू श्वेत।

निराकार की अविश्वसनीय माया

तुम्हरे शरण गाहै जो कोई भी नहीं।

तर सकल संकट सों सोई

सरस्वती लक्ष्मी काली।

दिपैम की जय जयकार निराली

तुम्हरे महिमा पार नपां ।

जो शारद शत मुख गुन गावैं

चार वेद की मात पूनीता ।

तुम ब्रह्माणी गौरी सीता

महामंत्र जगमहोत्सव।

कोउ गायत्री सम नाहीं

सुमित हिय में ज्ञान प्रकाशन।

अलस पाप अविद्या नासिक

रोग बीज जग जननी भवानी।

कालरात्रि वरदा कल्याणी

ब्रह्म विष्णु रुद्र सुर जेते ।

सों पावन सुरता तेते

भक्तन के भक्त तुम।

जननिहिंदू प्रेग्नेंसी प्रीति

महिमा पर्व ।

जय जय जय त्रिपदा हारी

पूरित सकल ज्ञान विज्ञान।

आप अधिक से अधिक जग में आना आना

तुम्हीं जानी कछु बाकी है न ।

आप अध्यात्मिक है न कल्यासा

जानत व्‍यवस्‍था व्‍यवस्‍था।

पारस परसी कुधातु सुहाई

तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई ।

माता तुम सब ठौर समाई

ग्रह ग्रह ग्रह

सब रफ्तार वन आपके प्र्रे

वृहद स्वास्थ्य की प्राण विधाता।

पालक रोगनाशक

मातेश्वरी दया व्रत धारी ।

तुम सन तार पातकी ग्रेटा

जापर कृपाण विवाह करना ।

कृपा कृपा करें सब कोई

मानसिक बुद्धि ते बुद्धि बल पावें ।

रोग रोग रहित हो जावेन

दरिद्र मित्तर कटै सब पीरा ।

नाश दुःख हरै भौरा

होम कल्याश चिट चिंत्य ग्रेटर

नासा गौत्री भभभ्यती

संतति ह्वेन सुसंति पावेन।

सुख संपति मोड प्रबंधन वें

भूत पिशाच सब भयावहता।

यम के निकटवर्ती नहिं

जो साधा सुमिरें चिट लाई ।

अछत सुहाग सदा सुखदायक

घर वर सुख परिवार लहैं कुमारी।

विद्या सत्य व्रत धारी

जयति जयति जगदंब भवानी ।

तुम सम ओर दील न दानी

जो सगुरु सो दीक्षा पावे ।

सो सेवा को सपसे

सुमिरन करे सुरूचि बडभागी ।

लहै मनोरथ घर विरागी

अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता ।

सब समर्थ गायत्री माता

ऋषि मुनि यती तपस्वी योगी।

आरत अर्थी भोगी

जो जो शरणागति को समाप्त कर रहा है।

सो सो मन फल पावेन

बल बुधि विद्या शील स्वभाउ ।

धन वैभव यश तेजो

घास नाना ।

जे यह पाठ करै धारी ध्याना

यह निष्क्रियता पाठ करै जो कोई भी ।

टैप कृपा प्रसन्नता गायत्री की होय

निर्जला एकादशी 2021 : निरजला एकादशी व्रत में गलत करें न करें।

  • आरती गायत्री माता

आरती श्री गौत्रीजी की ज्ञानद्वीप और श्रीमति की बात। सो धाी पूरित करै जंह को।। आरती…
मानस की शुची थाल के आधुनिकीकरण। देवी की ज्योति जगजाहिर नीकी .. आरती…

शुद्ध मनोरथ ते जहां घण्टा।
बाजै करै आसुह ही की।। आरती…
जाके प्रेक्षक तिहुं लोक के।
गड्डी सब हुं लगे फीकी।। आरती…

आरती प्रेम सौ नेम सो करि।
ध्‍व व्‍यवस्‍था की मूरति ब्रह्म लाली।। आरती…

संकट आवै न पास कब तक।
सम्पादित और सुख की बनैली।। आरती..

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