Panchaang Puraan

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साल ज्येष्ठ माह में शुक्ल्स की तारीख को डेट्स तिथि को गंगा दशहरा का पावन पर्व है। साल 20 जून 2021, इस अभियान के लिए इस मौसम में दशहरा का खेल जारी रहेगा। इस दिन व्यवस्था- व्यवस्था से गंगा की पूजा- क्र.सं. इस घर के मुख्य कार्य में “द्वार पत्र” की भी परंपरा है। यह पारंपरिक रूप से लागू होता है। हिन्दू धर्म में गंगा दशहरा का अत्यधिक महत्व है। अपने दैनिक कार्य के अनुसार हर व्यक्ति को अपना कार्य करने के लिए. “द्वार पत्र” फ्रेम का अधिक महत्व है। मूल्य मदर्स “द्वार पत्र” का महत्व…

गंगा दशहरा “द्वार पत्र” का महत्व

  • इस पत्र को .
  • सकारात्मक पत्र सकारात्मक रूप से ग्रहण कर सकते हैं।
  • ढा को घर में घर में सुख-समृद्धि का वास है।

गंगा दशहरा 2021 : 20 जून को गंगा दशहरा, जानें पूजा-विधि, महत्व, मंत्र, आरती और मुहूर्त

“द्वार पत्र” में कुछ श्लोक भी लिखे हैं…

अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशम्पायन रस च।
मिनिश्चिश्च सुमन्तुश्च पंचचैते वज्र वारका:..1..

मुने कल्याण मित्रस्य जैमिनेचन्या कीर्तनात।
विद्युदग्निभयंनास्ति टाइप च घरोदरे।।2।।

यत्रनैपायी ख्यात हृदयेश्वर हरिश्वर:।
खंडो भवति वज्रस्य तत्र शूलस्य का कथा..3..

गंगा दशहरा 2021: गंगा दशहरा कल, इन 5 शुभ मुहूर्तों में मां गंगा की पूजा, जानें घर में कैसे करें पूजा- आरच

में हर उत्तराखंड में “द्वार पत्र”

  • मां गंगा का उद्गम स्थान गंगोत्री, उत्तराखंड में है। गंगा दशहरा के पावन दिन उत्तराखंड के हर घर के मुख्य नियंत्रक नियंत्रक पत्र की परंपरा है। में गंगा दशहरा के पावन पर्व को बड़े धूम-धाम से कार्यक्रम है। गंगा दशहरा होने के सुबह आदि से पूर्व सूचना के बाद मेवाँ का नियंत्रण “द्वार पत्र” में होता है।

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