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गंगा दशहरा 2021: हर कल्क्स की तारीख को तारीख़ को तारीख़ तारीख़ तारीख़ तारीख़ तारीख़ तारीख़ तारीख़ तारीख़ तारीख़ तारीख़वार तिथियाँ हों। क्रिया के अनुसार इस क्रिया के बाद गंगा का बदलना था। साल 20 जून 2021, इस अभियान के लिए इस मौसम में दशहरा का खेल जारी रहेगा। दशहरा के पावन नदी में गंगा नदी में विशेष गुण हैं, इसलिए गंगा जल में गंगा नदी में नहाने के लिए विशेष महत्व रखता है। बार-बार माँ गंगा का ध्यान दें। इस दिन गंगा की विधि- व्यवस्था से पूजा- क्रंच से मां गंगा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ है श्री गंगा चालीसा के पाठ से ग्रॅन की विशेष कृपा प्राप्त होती है

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  • श्री गंगा चालीसा (श्री गंगा चालीसा)

दोहा

जय जय जय जग पावनी जयति देवसारी गैंग ।

जय शिव जटा निवास अद्वितीय तूंग तुंग

चौपाई

जय जग जननि अघ ख़ान, आनंद करनी गंग महनी ।

जय भागीरथि सुरसरी माता, कलिमल मूल दलनि विख्याता ।।

जय जय जय हनु सुता अघ अनानी, भीषम की माता जग जननी ।

धवलकम दल मम तनु साजे, लखी शत चन्द्रमा छवि लाजे ।।

मकर विमल शुचि वाहन है, अमिय कलश कर लखि मन मोहै।

जदित रत्न कंचन जेवर, हिय मणिहर्य, हरणितम दूषण ।।

जगपावनी त्रय ताप नासावनी, तार तंग मन भावनी।

जो गणपति अति पूज्य प्रधानाध्यापक, तिहुं ते प्रथमग आस्ना ।।

ब्रह्म कमंडलवासिनी देवी श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवी ।

साथी सहस्त्र सगर सुतवायरो, गंगा सागर तीरथ धारयो ।।

आगम तरंग उठयो मन भावन, लखी तीरथ सुहावन।

तीरथ राज प्रयाग अक्षैवट, धरयौ मातुनी काशी करवट ।।

धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीड़, तारणि अमित पितृ पद पीढी।

भागीरथ तप कियो अपरा, दियो ब्रह्मम तो सुरसरि धारा ..

जग जननी लहरी लहरी, शंभु जटा महं रयो समई ।

वर्ष पर्यंत गंग माही, वर्ष शंभु के जाटानी ..

मुनि भागीरथ शंहिं ध्यायो, भुभुब जटा से पायो ।

ताते मातुई त्रय धारा, मृत्यु लोक, नभ अरु भरा ।।

संपूर्ण प्रभावति नामा, मंदिग्नि गगन ललामा ।

मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी, कलिमल हरणि आगम जग पावनी ।।

धनि मइया तव महिमा महान, धर्म धुरि कलि कलुष कुठारी।

मातु प्रभावति धनि मन्दिनी, धनि सुरसरित सकल भयावहनासिनी ।।

पान करत निर्मल गंगाजल, पावत मन हृदय फल फल ।

पूरब जन्म जब जागत,

जय पगु सुरसरी गोविं, तईजि अश्वमेध फल पावहिं् ।

महा पति जेमिंग काहु न तार, तिन तारे इक नाम तिहारे ..

शत योजनहू से जो ध्‍व व्‍यवस्‍था, निश्‍चय विष्णु लोक पद पाव व्‍यवस्‍था ।

नाम भजत अगणित अघ नाशे, विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशै।।

जिमी धन मूल मूल धर्म अरु दिवस, मूल मूल गंगाजल पन्ना।

तव गुण गुणन करत सुख भाजत, घर के घर सुमति विराजमान ..

गंगहिं्ग नेम सहित निज ध्यान, दुरजनहुं सम्मान पद पावत।

विद्या विद्या बल पावै, वैल, रोग मुक्त ह्ह्वै जाप।।।

गंगा गंगा नर कहहीं, गंधी कबूं न रईं ।

सैट की मुख धुंए में चलने वाला वायुयान, दाबी यम चलने पर चलने ..

महां अधिन अधमन कहं तारें, भे नर्क के बंध किवारे ।

जो नर जैप गंग शत नामा, सकल सिद्ध पूरण हंवै कामा ।।

भोग भोगी परम पद पाव्ग, जावेग ह्‌‌‌वैवैयहिं् ।

धनि मइया सुरसरि मनोरंजनैं, धनि धनि तीर राज त्रिवेणी ।।

क़रा ग्राम ऋषि दुरवासा, सुन्दरदास गंगा कर दासा।

जो यह पेया गंगा चालीसा, मिले भक्त अविरल वागीसा ।।

दोहा

नट नव सुखी सुखी है, धरन, गंग का ।

अंत समय सुरपुर बसै, सादर बैठक विमान ॥

सम्पादित भुज नभ दिशि, राम जन्म दिन चैत्र।

पूण्यवस्था कियो, हरि भक्तन हितैनैत्र

..इतिश्री गंगा चालीसा फाइनल।।

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