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diwali 2021 maa laxmi ganesh puja aarti lyrics in hindi diwali ke din ki aarti – Astrology in Hindi – दिवाली आरती संग्रह : लक्ष्मी

दिवाली आरती संग्रह : हिंदू पंचांग के तिथि, तिथि तिथि के अनुसार तिथि समाप्त होने के बाद। माँ लक्ष्मी, गणेश गणेश, पूजा देवी सरस्वती, धन दिवा देवता कुबेर और माँ काली की है। ️ मान्यता️ मान्यता️ मान्यता️️️️️️️️️️️️! ️ मान्यताओं️ मान्यताओं️ मान्यताओं️️️️️️️️️️️️! पर लक्ष्मी- गणेश की पूजा-आरंभ करने के बाद ये दिवाली आरती करें…

गोकू गणेश की आरती-

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पापा महादेवा।।

एकदंत, दयावन्त, बंध्याचारी,
मैं सिन्दूर सोहे, मौस की आदत।
पान पेये, फूले प्रसाद और प्रसादी मेवा,
लड्डूअन का भोजनालय, सन्त सेवा।। ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पापा महादेवा।।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बंझन को पौत्र, निरधन को माया।
‘सूर’ श्यामा शरण, सप कीजे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
माता जाकी पार्वती, पापा महादेवा।

दीन की लाज, शंभु सुतकारी।
सुन को पूर्ण करो जय बलिहारी।

माता लक्ष्मी की आरती-

जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निशदिन सेवत, मैया जी कोशदिन * सेवत हरि विष्णु विधाता

जय लक्ष्मी माता-2

उमा, रमा, ब्रह्मणी, तुम ही जग-माता:

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता

जय लक्ष्मी माता-2

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख दाता

जो तुमको ध्यानवत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता

जय लक्ष्मी माता-2

तुम पाताल-निवासीनि, तुम ही शुभादाता

कर्म- प्रभाव-प्रकाशिनी, संस्था की त्राता

जय लक्ष्मी माता-2

सब सद्गुण

ज्ञान की प्राप्ति, मन की पवित्रता

जय लक्ष्मी माता-2

तुम्‍ब…

खान-पान का वैभव, सभी प्रकार की दृष्टि

जय लक्ष्मी माता-2

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोधि-जाता

रत्न चतुर्दश

जय लक्ष्मी माता-2

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता

उर आनंद समाता, पछाड़ उतरना

जय लक्ष्मी माता-2

जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निशदिन सेवत,

मैया जी को निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता

ॐ जय लक्ष्मी माता।

विष्णु विष्णु की आरती-

ॐ जय जगदीश, स्वामी! जय जगदीश।
भक्तजनों के संकट में दूर करे॥

जो ध्याय फल पावै, दुर्भाग्य से मन का।
सुख-संपति घर, अचंभेड़ मिटे तन का॥ जय…॥

माता-पिता मेरे, शरण गहुं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, अस्स बैठक जय…॥

तुम पूनम महात्म्य, तुम अंतर्यामी॥
परब्रह्म परेश्वर, आप अद्भुत जय…॥

तुम करुणा के सागरों को पालने वाले।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भरता॥ जय…॥

एक अगोचर, आप असफल रहे।
विधि मिलन दयामय! तुमको मैं कुमति॥ जय…॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने गणपति, डा. जय…॥

विषय रोधीओ, पाप हरो देवा।
स्मार्ट-भक्ति बढ़ाएं, संतन की सेवा॥ जय…॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ।
तेराको अर्पणा। जय…॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ जय…॥

हनुमान जी की आरती-

आरती की जय हनुमान लाला की। दुमरा दल रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरवर कांपे। रोग दोष जाके निकटवर्ती ने..

विशेष रूप से प्रबल पुरुष। संतान सुख सदा सहाय।

दे बीरा रघुनाथ पठा। लंका जारी सिआ सुध.

लंका सोरट समुद्री मछली। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित संचाररे। आणि संजीवन प्राण उबारे।

पानीती पताल तोरी जम करे। अहिरावण की बाँटे।

बांबां असुरदल। राइट बंब सेंटजन तार।

सुर-नर-मुनि जन आरती। जय जय जय हनुमान उचारे।

कंचन थार कूपर ला चाई। आरती करत अंजना।

लंकविविध्वंस कीं रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीर्ति गाई।

जो हनुमान जी की आरती गाय। बसी बैकुंठ परमपद पावै।

आरती की जय हनुमान लाला की। दुम का दल रघुनाथ कला की

गोकू श्री राम की आरती-

हे रे रामती आरती थोाँ
आरती पूरी तरह से तन मन बार,

कनक शिसन जुड़वाँ,
दशरथ नंदन जनक किशोर,
युगुल छबि को सदा निहार,
हे रामेती आरती थोड़ी…

बम भाग शोभाति जग जननी,
चरण बिराजत है सुत अंजनी,
सदाबहार को सदा पखारू,
हे रामेती आरती थोड़ी…

आरती हनुमंत के मन भाये,
राम कथा नित शिव जी गो,
राम कथा हिरदय में थोड़ी देर में,
हे रामेती आरती थोड़ी…

घड़ी से बाहर गंगा,
बधन मौसम,
अन में शश को धारू,
हे रामेती आरती थोड़ी…

आरती माता सरस्वती-

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदागुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्यातता॥
मैं जय सरस्वती माता…॥

चन्द्रवदनि पद्मिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस, अतुल तेजारी॥
मैं जय सरस्वती माता…॥

पास कर में वीणा, मिल कर।
शश कुट मणि सोहे, गल मोतियन मलिक
मैं जय सरस्वती माता…॥

देवी शरण
पैठनी मंथरा दासी, रानक संहार
मैं जय सरस्वती माता…॥

विद्या ज्ञान ज्ञानी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
मैं जय सरस्वती माता…॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करते हैं।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
मैं जय सरस्वती माता…॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखी, ज्ञान धाकड़ पावे॥
मैं जय सरस्वती माता…॥

जय सरस्वती माता, जय सरस्वती माता।
सदागुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्यातता॥

श्री काली चालीसा

दोहा

जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगमाम
मर्दिणी कालिका, देहु अभय वैब्य ॥

अरि मद मान वन हरी । मुण्डमाल गल सोहत कीट
अष्टभुजी संतुष्ट संतुष्ट । सर्वदलन जग में विख्यातता 1॥

भाल विशाल कुट छवि जैज। कर में शत्रु का साजै
दूजे तालिका के लिए मधु प्याला। तालिका सोहत भाला 2॥

हवा खप्‍पर खड्ग कर पांचे । त्रिशूल शत्रु जांच ॥
सप्तम करदमकत असिप सिक्योर। शोभा देवी विवाह 3॥

अष्टम कर भक्तन वर दाता । जग मनहरण रूप ये माता
भक्तिन में अनुरक्त भवानी । निशदिन रटें षी-मुनि ज्ञानी 4॥

महाशक्ति प्रबल पुनीता । ता काली तुम ही सीता
तवारीनी हे जग पालक । कल्याणी पापी कुल घलक 5॥

शेष सुर न पावतपार। गौरी रूप धर्यो इक बार
आप समानार्थी नहिं दूजा । विधिवत: भक्तजन पूजा 6॥

भयानक भयावहता जब आप धारा । दुलहन कींहेहु संहारा
नाम बहुत सारे। भक्तजनों के संकट तारे 7॥

कल कल कलन हरनी । भव भभभन्यास
महिमा अगम वेद यश गावैं। नारद शारद पर न पावैं 8॥

भू पर भाज्य . प्रकट
अनादि अभय आदि वरदाता । विश्वविदित भव संकट त्राता 9॥

कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा। सदा अभय वर दिना
ध्यान धरण श्रुति शेषा । काल रूप लखी तुमो भेषा ॥10॥

कलौआ भानों संग संग । अरि हित भयाभ धारे
सेवक लंगूर रेत अगारी । चौसठ जोगन आज्ञाकारी 11॥

त्रेता में रघुवर हित आई। सौंधर की सैन साई
ललारण का खेल निराला । दे-मज्जा से प्याला 12॥

रंध्र रूपी लखी दिवस भागे । कियौ गवन ने नया जोड़ा ॥
ऐसौ तामस तोप आयो । स्वजन विल को भेदयो ॥13॥

ये बाल खीर ​​शंकर. राह रोक चरन में धाए
मुख गले निकर जो आई । विशेष रूप से तेज़ है ॥ 14.

बाढ्यो महिषासुर मदी ग्रेटा । परिवादी सकल नर-नारी
करुणामय भक्तन की। पीर मित्र हित जन-जन की 15॥

प्रगति निज सैनी है । नाम माता महिष विजयी
शुभ निशुंभ हने छन माही। तुम समज दूसर कोउ नाहीं 16॥

मान मठाहारी खल दल के । सदा सहायक भक्त विकी के
दीन विहीन सेवा सेवा । पावैं मनवांछित फल मेवा ॥17॥

संकट में जो सुमिरन करहीं । उनके अडच मातु तुम हरिं
प्रेम सहित जोरती गावैं । भव बन्धन सों मुक्त पावैं 18॥

काली चालीसा स्वर्गलोक बिनु बेटलिंग
दया दृष्टि हरौजदंबा। केहि माँ कियौ विलम्बा ॥19॥

करहु मातु भक्तन पर्वावली । जयति जयति काली
सेवक दीन अनाथ अलरी । भक्तिभाव शरणागति 20॥

दोहा

प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ ।
तिनकी पूसन सन्ध्या, होय सकल जागरण ॥

  • कुबेर जी की आरती-

ऊँ जय यक्ष कुबेर,
स्वामीजय यक्ष जैन यक्ष कुबेर ।
शरणागति भगतों के,
भंडार कुबेर प्रीतिभोज ।
मैं ऊँ जय यक्ष कुबेर…॥

शिव में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।
दैत्यव मानव से,
कई-कई लाइक
मैं ऊँ जय यक्ष कुबेर…॥

स्वर्ण आसन,
शीर्ष पर छत्र फिरे,
स्वामी शीर्ष छत्र फिरे ।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार
मैं ऊँ जय यक्ष कुबेर…॥

गदा त्रिशूल तालिका में,
शस्त्रा धरे,
स्वामी शस्त्रा धरे ।
आपदा संकट मोचन,
धनु तंकार करें
मैं ऊँ जय यक्ष कुबेर…॥

व्यंजन के बने,
स्वामी व्यंजन बने ।
मोहन
साथ में उड़ना
मैं ऊँ जय यक्ष कुबेर…॥

बल बुद्धि विद्या दाता,
हम शरणाती,
स्वामी हम शरणागति ।
अपने भक्त जनों के,
बेक काम सनवारे
मैं ऊँ जय यक्ष कुबेर…॥

कु मणि की शोभा,
मोत नारद,
स्वामी मोतें नारद ।
अगर कपूर की बात,
चोट के जोत जले
मैं ऊँ जय यक्ष कुबेर…॥

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे ॥
मैं इति श्री कुबेर आरती

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