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Center Approves To Build Four Rescue Centers In Up For Tigers And Leopards – अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : बाघ और तेंदुओं को बचाने के लिए यूपी में बनेंगे चार सेंटर, केंद्र की मंजूरी

अजीत बिसारिया, लुधियाना

द्वारा प्रकाशित: सत्यंत शर्मांत
अपडेट किया गया गुरु, 29 जुलाई 2021 04:22 AM IST

खबर

क्षेत्र के लोगों के लिए आराम करने वाले लोग आराम करने के लिए आराम करते हैं। चार क्यू आ जल्दी ही क्रमादेश जारी किया गया।

यू.पी. में बाघों की भीड़ बढ़ रही है। जंगली से गुणवत्ता मनुष्य और प्रकृति में भी हैं। इस पर पोस्ट करने के लिए राज्य सरकार ने पीलीभीत, महराजगंज और कूट में एक-एक रेस्क्यू सेन्टर का एक स्रोत को सुपुर्द किया। इस तरह के मौसम के दौरान इस संबंध में सोचा गया था कि वे संतुलित और संतुलित हों।

वन विभाग के अनुसार, मीटिंग में इन सभी प्रकार के व्यक्ति की स्थिति में समान होंगें। एंटाइटेल के वायलेट के वायलेटों को वेजिबब में रखा जाता है। रेस्क्यू सेन्टर के लिए विशेष आकर्षण। एक रेक्यू सेन्टर की लागत 4.90 करोड़ रुपये।

बीते एक साल के आंकड़ों के मुताबिक दुधवा व पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों और पश्चिमी व पूर्वी यूपी में नदियों के कछार में अक्सर तेंदुए देखे जा रहे हैं। में रामागंगा नदी के बाघिन ने दो लोगों को बिजली से बनाया था।’ क्षेत्र के इन अलग-अलग-अलग-अलग शाखाओं में रेक्यू सेन्टर से जंगल के बाहर जाने और बाहरी स्थिति में जाने के लिए।

रेस्क्यू सेन्टर में वन्य-जीव के खतरनाक मौसम और खतरनाक वायु भी खतरनाक होते हैं। निकटता में ही रेक्यू सेन्टर पर संचार में कम समय में रहने वाले होने के लिए, मानव-जीवन पर्यावरण में कमी करें।

25 हेक्टेयर में सोशल मीडिया
पीलीभीत में बाघों के लिए रिवाइव्ड सेन्टर पर भी डाई है जो की दे सकता है। यह सेन्टर 25 हेक्टेयर क्षेत्र में है। जो भी सदस्य टीम को सहयोग करने में मदद की, उन्होंने आगे बढ़कर काम किया।

यूपीआई में इकाइयाँ रेक्यू सेन्टर और रिवाइव्ड सेन्टर एक के लिए एक डाई क्लीना की आवश्यकता है। एक-दो सप्ताह में लिखित आदेश (कार्य दिनांक) प्राप्त होने की उम्मीद है।
– संजय श्रीवास्तव, प्रधान प्रधान मुख्य वन संरक्षक

कटि

क्षेत्र के लोगों को आराम मिलता है और वे आराम करने वाले लोगों के लिए आराम करने के लिए काम करते हैं।. चार क्यू आ जल्दी ही क्रमादेश जारी किया गया।

यू.पी. में बाघों की भीड़ बढ़ रही है। जंगली से गुणवत्ता मनुष्य और प्रकृति में भी हैं। इस पर पोस्ट करने के लिए राज्य सरकार ने पीलीभीत, महराजगेंज और कूट में एक-एक रेस्क्यू सेन्टर का एक स्रोत को सुपुर्द किया था। इस तरह के मौसम के दौरान इस संबंध में सोचा गया था कि यह संतुलित और संतुलित होगा। (कैंपा ने सोचा कि यह कैसा रहेगा।) ️️️️️️️️️️❤️️️️️️️️️️️

वन विभाग के अनुसार, मीटिंग में इन सभी प्रकार की प्रविष्टियाँ उसी प्रकार से होती हैं। एंटाइटेल के वायलेट के वायलेटों को वेजिबब में रखा जाता है। रेस्क्यू सेन्टर के लिए विशेष आकर्षण एक रेक्यू सेन्टर की लागत 4.90 करोड़ रुपये।

बीते एक साल के आंकड़ों के मुताबिक दुधवा व पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों और पश्चिमी व पूर्वी यूपी में नदियों के कछार में अक्सर तेंदुए देखे जा रहे हैं। में रामागंगा नदी के बाघिन ने दो लोगों को बिजली से बनाया था।’ क्षेत्र के इन अलग-अलग-अलग-अलग कंट्रोल से रेक्यू सेन्टर से बाहर निकलने के लिए और बाहरी स्थिति में जाने के लिए।

रेस्क्यू सेन्टर में वन्य-जीव के खतरनाक मौसम और वायु भी खतरनाक हैं। निकटता में ही रेक्यू सेन्टर पर कम समय में रहने वाले होने के लिए, मानव-वन्य जीव में कमी करें।

25 हेक्टेयर में सोशल मीडिया

पीलीभीत में बाघों के लिए रिवाइविंग सेन्टर पर भी डाई है जो की दे सकता है। यह सेन्टर 25 हेक्टेयर क्षेत्र में है। जो भी सदस्य टीम को सहयोग करने में मदद की, उन्होंने आगे बढ़कर काम किया।

यूपीआई में इकाइयाँ रेक्यू सेन्टर और रिवाइव्ड सेन्टर एक के लिए एक डाई क्लीना की आवश्यकता है। एक-दो रिपोर्ट क्रमादेश (कार्य दिनांक) प्राप्त होने की उम्मीद है।

– संजय श्रीवास्तव, प्रधान प्रधान मुख्य वन संरक्षक

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