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Bhaum Pradosh Vrat – भक्तों को भयमुक्त करता है भगवान शिव और हनुमान जी को समर्पित यह उपवास

प्रदोष व्रत को शिव-म पार्वती के व्रत में सर्वोत्तम किया गया। संकट आने पर संकट और अधिक बढ़ जाएगा। आने वाले दिन में प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत है। मंगल ग्रह का एक अन्य भौम है, जो आने वाले नाम प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत है। इस व्रत में शिव के साथ हनुमान जी का परागण है। मनोवृत्ति से मनोवृत्ति पूर्ण होने में और हर प्रकार का भेद हो जाता है। सुरक्षा का संचार करना, कर्ज से मुक्ति और पुरानी बीमारी दूर करना। व्रत के प्रभाव से शौर्य में वृद्धि होती है।

हनुमान जी को हनुमान जी का वचन कहते हैं, इसलिए इस व्रत को करने के लिए वे प्रसन्न होते हैं। ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ है है हैं व्रत है हैं व्रत है हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं है हैं हैं है हैं है हैं है हैं???????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????? किसी भी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष होता है इस घटना के लिए यह शुभ होना चाहिए। प्रदोष व्रत में शिव की पूजा की जाती है। सूर्यास्त से 45 मिनट तक और सूर्य के समय के 45 मिनट के प्रदोष काल में। दिन के समय ️ चालीस️ चालीस️️️️️️I इस व्रत-पूजन से मंगल ग्रह की शांति। हनुमान हंबुंड में बजरंगबली के लड्डू। प्रष काल में श्वा का मंत्र मन से ध्यान दें। अपनी गणना के हिसाब से गणना करें। जो भी ऐसा करने के लिए इस व्रत को रखें ताकि देश में सुख-समृद्धि बनी रहे।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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