Panchaang Puraan

august 2021 rashifal astrology horoscope predictions bad negative effects on zodiac signs – Astrology in Hindi

कुछ इसी तरह अगस्ता का होने शुरू होने जा रहा है। महीना️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ अगस्त के भविष्य में बुध, सूर्य और शुक्र ग्रह। आँकड़ों में परिवर्तन गणित है। सूर्य के राशि परिवर्तन का सभी राशियों पर प्रभाव- प्रभाव प्रभा है। जानते

अगस्ता का इन राशियों के लिए मानसिक से भरा-

  • मीन
  • वृष:
  • कन्या
  • तुम

सावन का पहला पहला कल, मकर, कुंभ, धनु, मिठाइयां और लोग जरूर देखें ये छोटे सा उपाय

अंदर का सामना करना पड़ रहा है-

  • धन- भविष्य हो सकता है।
  • परिवार के विकास के साथ मनमुटाव हो सकता है।
  • कामयाबी के लिए अधिक मेहनती धन।
  • अगस्ता के लिए चेतावनी।

ये उपाय-

  • हनुमाना का पाठ से सभी प्रकार के दुख-दर्द दूर हों ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ हनुमान जी कलयुग में भगवान हैं। हनुमान जी की कृपा से पूरी तरह से ठीक हो रहे हैं। हनुमान जी की कृपाण प्राप्त करें। हर व्यक्ति को हनुमानजी का पाठ करना चाहिए।

इस योजना में शामिल होने के लिए 210

श्री हनुमान चालीसा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनुज मुकुरु सुधारना।

बरनौ रघुबी जसु, जोबड़मलुलु फलचारि।।

बुद्धिमान तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

जय कपिस तिहुं लोक सभा।।

रामदूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नाम।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कान केलकुंड केसा।।

बजर औ ध्वजा बिराजै।

कांधे मुंज जनेऊ साजै।

स्नीकर सुवनमन्दन।

तेज प्रताप महाजज बंधन।।

विद्या गुनी अति चतुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु की विशेषता सुनिबे कोसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म धरि सिंयधवा।

बिट रूप धारी लंक जरावा।।

भीम रूप धारी असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे।।

जीवन जीवन लखन जियाये।

श्रीरघुबीर हरि उर लाये।।

रघुपति कीह्न बड़ाई.

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हारो गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ वातावरण में।।

सनकदिक ब्रह्मदि मुनिसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिग्पाल जहां रहते हैं।

कबी कोबिद कहलाते हैं..

आप उपकार सुगौरवहिं.

राममिलन राज पद दीन्हा।।

हरो मंत्र बिभीषन।

लंकेस्वर भे सब जग जाओ।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मुख्‍य महिने।

जलधि लांघी अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज के जेते।

आस-पास के मौसम आपस में जुड़ें।।

राम दारे तुम रखवाले।

नत आदेश बिनु पैसा रे हो।।

सुखी रहती है सबना।

तुम काहु को भय ना।।

आपन सुधारो आपै।

सो लोक हांक तें कांपै।।

पी भूतसाच निकटवर्ती नहिं अवै।

महावीर सुनाना…

नासिक रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतरता हनुमत बीरा।।

आपदा

मन-बच्चा ध्यान जो योग्य।।

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज कुल साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप।

सिद्ध है उजियारा।।

सुचना-संत के तुम रखिए।

असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि धन राशि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता..

राम रसायन तुम्‍हारे पासा।

सदा रघुपति के दासा।।

आप भजन राम जी को पावै।

जन्म-जन्म के दुःख बेस्रावै।।

अंतकाल रघुबर पुर जाई।

जहां जन्मा हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरी।

हनमत सेई सरब सुख करई।।

आपदा कट मित्त सबेरा।

जो सुमिरन हनुमत बलबीरा।।

जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई.

लहि बंदी महा सुख होई।।

जो यह हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

की जै नाथ हृदयस्पर्शी ..

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसु सुर भूप।।

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